छतरपुर PWD-भवन विक्रय मामला: छोटे अफसर सस्पेंड, बड़ी मछलियां सुरक्षित! नगरपालिका को सिर्फ नोटिस
लोक निर्माण विभाग (PWD) की कीमती जमीन बेचने के मामले में प्रशासन ने आखिरकार कार्रवाई तो की, लेकिन सवाल यह उठ रहा है कि क्या यह कार्रवाई सिर्फ छोटे अफसरों तक सीमित है?
विभाग के चीफ इंजीनियर, सागर संभाग ने प्रभारी SDO कमलेश मिश्रा, सहायक ग्रेड-3 विजय कुमार खरे और कर्मचारी राजाराम कुशवाहा को लापरवाही का दोषी मानते हुए निलंबित कर दिया है।
वहीं, जिला प्रशासन ने नगर पालिका छतरपुर के सीएमओ को मात्र नोटिस देकर अपनी औपचारिकता पूरी कर दी — जबकि जमीन की बिक्री में नगरपालिका की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
अफसरों की लापरवाही से विभाग की जमीन बिकी
यह पूरा मामला हाईकोर्ट के प्रकरण एफ.ए./06/2005 से जुड़ा है। कोर्ट ने 4 अक्टूबर 2024 को आदेश दिया था, लेकिन PWD अधिकारियों ने उस पर कोई कार्रवाई नहीं की।
लापरवाही इतनी बड़ी थी कि विभाग की कीमती सरकारी जमीन बेच दी गई, और जब मामला सामने आया तो कुछ कर्मचारियों पर गाज गिराकर मामले को ठंडे बस्ते में डालने की कोशिश की जा रही है।
नगरपालिका पर केवल नोटिस क्यों?
एडीएम मिलिंद नागदेवे ने बताया कि रजिस्टर में ओवरराइटिंग और नियम उल्लंघन पाए जाने पर नगर पालिका को नोटिस जारी किया गया है।
लेकिन सवाल उठता है कि —
जब जमीन की बिक्री में नगरपालिका की संलिप्तता साफ है,
तो केवल नोटिस देकर उसे बख्शा क्यों गया?
क्या बड़ी कुर्सियों पर बैठे लोगों को बचाने की कोशिश हो रही है?
स्थानीय लोगों का कहना है कि
“कार्रवाई सिर्फ छोटे कर्मचारियों तक सीमित है, जबकि असली जिम्मेदार अफसर बचा लिए गए हैं। यह कार्रवाई नहीं बल्कि लीपापोती लगती है।”
अनुशासनात्मक प्रस्ताव भोपाल भेजा गया
सागर संभाग के चीफ इंजीनियर ने इस मामले में तत्कालीन प्रभारी कार्यपालन यंत्री आर.एस. शुक्ला (जो 31 अगस्त 2025 को रिटायर हुए) और कमलेश मिश्रा के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रस्ताव भोपाल भेजा है।
पर सवाल वही — क्या सिर्फ यही लोग जिम्मेदार हैं?
