भारत के माननीय उपराष्ट्रपति श्री जगदीप धनखड़ ने आज घोषणा की कि विकसित भारत अब एक सपना नहीं बल्कि एक निश्चित लक्ष्य है। उन्होंने कहा, “हमें गीता के ज्ञान को याद रखना चाहिए। अर्जुन ने जो ध्यान दिया- उनकी नज़र मछली पर नहीं बल्कि लक्ष्य पर थी। हमें यह सुनिश्चित करने के लिए वही दृष्टि, ध्यान और दृढ़ संकल्प रखना चाहिए कि भारत 2047 तक या उससे भी पहले एक विकसित राष्ट्र का दर्जा प्राप्त कर ले।”
उन्होंने निस्वार्थ भावना की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए कहा, “तीसरा सिद्धांत निस्वार्थ समर्पण है। भगवान कृष्ण सिखाते हैं, ‘यज्ञार्थ कर्मणो’ – काम व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं बल्कि व्यापक भलाई के लिए होना चाहिए। इसी भावना के साथ, मैं सभी से अपील करता हूं कि 2047 तक विकसित भारत का निर्माण एक महान यज्ञ है। राष्ट्र के कल्याण के लिए सभी को अपनी क्षमता के अनुसार इस सामूहिक प्रयास में योगदान देना चाहिए।”
उपराष्ट्रपति ने रेखांकित किया, “चौथा सिद्धांत करुणा है। करुणा हमारी 5,000 साल पुरानी संस्कृति का सार है। कोविड-19 संकट के दौरान, भारत ने अपनी चुनौतियों का सामना करते हुए भी 100 से अधिक देशों को टीके उपलब्ध कराकर अपनी करुणामयी भावना का प्रदर्शन किया। आज, चाहे वह समुद्र में फंसे जहाजों को बचाना हो, युद्ध के दौरान छात्रों को निकालना हो, या भूकंप और अकाल जैसी प्राकृतिक आपदाओं के दौरान सहायता प्रदान करना हो, भारत हमेशा सबसे पहले प्रतिक्रिया देने वाला रहा है। इस करुणा को हर किसी के जीवन में जगह मिलनी चाहिए।”
श्री धनखड़ ने कहा, “पांचवां सिद्धांत परस्पर सम्मान है। प्रतिस्पर्धा आवश्यक है, लेकिन इससे संघर्ष नहीं होना चाहिए। आज, कोई दुश्मन नहीं है – केवल अलग-अलग दृष्टिकोण हैं। यह विविधता हमारे देश के लिए महत्वपूर्ण है। हमारे पास कितनी विविधता है, इस पर विचार करें, फिर भी यह सब एकता में परिवर्तित हो जाती है। इस विचार को पंचामृत ढांचे के तहत शासन में एकीकृत किया जा सकता है।”
उपराष्ट्रपति ने भारत की प्रगति और एकता के लिए चुनौतियों पर भी प्रकाश डाला और कहा, “देश के भीतर और बाहर कुछ ताकतें व्यवस्थित रूप से भारत की अर्थव्यवस्था और संस्थानों को कमजोर करने का प्रयास कर रही हैं। उनका इरादा हमारी संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करना और हमारी प्रगति के मार्ग को बाधित करना है। ऐसी ताकतों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।”
इस अवसर पर हरियाणा के राज्यपाल श्री बंडारू दत्तात्रेय, हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी, स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज और अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे।
