अर्थतंत्र एक दुरूह विषय के साथ-साथ एक बेहतरीन प्रौद्योगिकी भी है, जिसे आज के दौर में पूर्ण रूप से समझने व प्रबंधन करने की नितांत आवश्यकता है। अर्थतंत्र एक सर्वकुंजी के रूप में कार्य करती है, जो विकास के नये अवसर पैदा करने के साथ ही उन्नति का मार्ग प्रशस्त करती है। एक अल्प वेतन भोगी कर्मचारी के लिये एक सीमित आय में जीवन की मूल जरूरतों की पूर्ति करने के साथ-साथ परिवार के बेहतर भविष्य के लिये धन संचय करना एक बडी चुनौती है, इसमें केवल अर्थप्रबंधन ही हमें सहयोग कर सकता है।
मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय खण्डपीठ-ग्वालियर के प्रशासनिक न्यायाधिपति माननीय न्यायमूर्ति श्री आनंद पाठक के इसी अनुपम विचार के आधार पर प्रसारित निर्देशों के अनुरूप उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति-ग्वालियर के तत्वाधान में शनिवार को ‘‘वित्तीय कल्याण और भावनात्मक कल्याण” विषय पर उच्च न्यायालय परिसर में पदस्थ अधिकारी/कर्मचारीगण हेतु ऑनलाईन जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में वित्तीय प्रबंधन के विषय विशेषज्ञ के रूप में दिल्ली में प्रोफेसर के रूप में कार्यरत एवं वेल बीइंग शिक्षा फाउण्डेशन की प्रबंध निदेशक डा. नीलम टंडन द्वारा उपस्थित अधिकारी व कर्मचारीगण को विभिन्न वित्तीय पहलुओं की जानकारी देते हुये वित्तीय आवश्यकता को समझाया।
डा. नीलम टंडन द्वारा उक्त कार्यक्रम में धन प्रबंधन, वित्तीय लक्ष्यों का चुनाव व उनकी पूर्ति, आपातकालीन समय के लिये निष्चित निधि आदि महत्वपूर्ण विषयों को विस्तार से समझाते हुये धन बचत को प्राथमिकता देने पर जोर दिया, ताकि व्यक्ति अपने जीवन के अहम् लक्ष्यों की पूर्ति की ओर अग्रसर होकर स्वयं और अपने परिवार को सुदृढ करे।
माननीय न्यायमूर्ति श्री आनंद पाठक के विचारानुसार उच्च न्यायालय परिसर एक विष्वविद्यालय की तरह भी कार्य करता है, जहां हम प्रतिदिन अपने ज्ञान के सीमाओं को विस्तृत करते हैं। इसी विचार के अनुक्रम में पूर्व में भी दिनांक 21 अक्टूबर, 2024 को ‘‘वित्तीय साक्षरता व विधिक जागरूकता” विषय पर माननीय उच्च न्यायालय खण्डपीठ-ग्वालियर में पदस्थ न्यायिक व पुलिस सुरक्षा अधिकारी/कर्मचारीगण के लिये जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया था, जिसमें भी वित्तीय प्रबंधन की विषय विषेषज्ञ डा. नीलम टंडन द्वारा अर्थप्रबंधन के विभिन्न पहलुओं का अच्छी तरह समझाया था।
कार्यक्रम के अंत में डा. नीलम टंडन द्वारा उपस्थित अधिकारी व कर्मचारीगण की वित्तीय जिज्ञासाओं का भी यथोचित परामर्ष प्रदान कर निदान किया गया।
