जन्माष्टमी के पावन अवसर पर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भगवान श्रीकृष्ण के जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण स्थलों का भ्रमण करेंगे।
शनिवार 16 अगस्त को मुख्यमंत्री श्रीकृष्ण के गौरवशाली इतिहास और जीवन प्रसंगों से जुड़े स्थलों पर जाकर पूजा-अर्चना करेंगे।
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार मुख्यमंत्री सबसे पहले रायसेन जिले के महलपुर पाठा, फिर धार जिले के अमझेरा और उसके बाद इंदौर जिले के जानापाव पहुंचेंगे।
मुख्यमंत्री इन स्थानों के प्राचीन कृष्ण मंदिरों में दर्शन करेंगे और नमन करेंगे।
📍 महलपुर पाठा का महत्व
यहां स्थित राधा-कृष्ण और देवी रुक्मणि का 13वीं शताब्दी का प्राचीन मंदिर है। शिलालेख के अनुसार मंदिर का निर्माण संवत 1354 यानी सन् 1297 में हुआ था। मंदिर परिसर में किला और 51 बावड़ियां भी हैं, जो परमार वंश की विरासत को दर्शाती हैं।
📍 अमझेरा का महत्व
धार जिले का अमझेरा, भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मणि विवाह का ऐतिहासिक साक्षी माना जाता है। यहीं रुक्मणि हरण का प्रसिद्ध प्रसंग घटित हुआ था, जिसका वर्णन भागवत पुराण में मिलता है।
📍 जानापाव का महत्व
इंदौर जिले का जानापाव भगवान परशुराम की जन्मस्थली माना जाता है। मान्यता है कि यहीं भगवान परशुराम ने श्रीकृष्ण को सुदर्शन चक्र प्रदान किया था।
📍 उज्जैन भ्रमण
मुख्यमंत्री उज्जैन के गोपाल मंदिर और सांदीपनि आश्रम भी जाएंगे।
गोपाल मंदिर का द्वार सोमनाथ मंदिर का ऐतिहासिक द्वार माना जाता है, जिसे सिंधिया शासनकाल में वापस लाया गया था। वहीं सांदीपनि आश्रम वह पवित्र स्थल है, जहां भगवान श्रीकृष्ण, बलराम और सुदामा ने शिक्षा प्राप्त की थी।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इस यात्रा का उद्देश्य युवा पीढ़ी को भारत की गौरवशाली संस्कृति और इतिहास से परिचित कराना है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विरासत से विकास संकल्प के अनुरूप प्रदेश में श्रीकृष्ण पाथेय के विकास की योजनाएँ भी क्रियान्वित की जा रही हैं।
मुख्यमंत्री को जन्माष्टमी के अवसर पर प्रदेशभर से 20 से अधिक स्थानों पर आमंत्रण मिला है, हालांकि वे चयनित प्रमुख स्थलों का ही भ्रमण करेंगे।
जन्माष्टमी पर मुख्यमंत्री की यह विशेष यात्रा प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर और गौरवपूर्ण अतीत को नए सिरे से जन-जन तक पहुँचाने का एक प्रयास मानी जा रही है।
