महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय छतरपुर में चपरासी, चौकीदार की भर्ती परीक्षा विवादों में आ गई है। यूनिवर्सिटी में 16 पदों के लिए चयन परीक्षा हुई थी। परीक्षा के पहले ही विश्वविद्यालय छात्र संघर्ष समिति ने चयनित नामों का खुलासा करके सूची के पर्चे बांट दिए थे। अब परीक्षा और परिणाम आने के बाद उन्हीं उम्मीदवारों ने परीक्षा में टॉप किया है। दो हजार परीक्षार्थियों में दो भाई पहले और दूसरे स्थान पर हैं। सामान्य (अनारक्षित) श्रेणी के 6 पदों में से मेरिट में सबसे ऊपर रहने वालों में एक ही परिवार के चार लोगों के नाम हैं। उस पर्चे में जिसके चयन का उल्लेख है, उसी व्यक्ति अभिषेक और उसके भाई अमित तिवारी ने परीक्षा में टॉप किया है। 100 नंबर में से अभिषेक ने 96 और अमित ने 92 अंक प्राप्त किए हैं। इसके परिवार के दो अन्य सदस्यों के भी लिखित परीक्षा में सर्वाधिक नंबर हैं। एक ही परिवार के चार लोग चुने जाना तय हैं। क्या इतने बड़े विश्वविद्यालय मैं जो भी भर्तियां निकली जाती है वो सिर्फ सम्बन्धो के आधार पर ही वो पोस्ट भर दी जाती है एक ही परिवर के चार लोग कैसे मैरेट मैं आ सकते है इसके लिए कौन जुम्मेदार है प्रशासन या विश्वविद्यालय बिभाग या तो ये पोस्टे रिस्वत देके हुई है या सम्बन्धो के आधार पर किसी दूसरे व्यक्ति को मौका क्यों नहीं मिला। अगर इसी तरह से चलता रहा और केबल सम्बन्दो के आधार पर भर्तियां होती रही तो काबिल लोगो का क्या होगा।


