भारत का हृदय प्रदेश, मध्यप्रदेश अपनी अद्वितीय प्राकृतिक सुंदरता, सांस्कृतिक धरोहर और आध्यात्मिक धामों के लिए पूरी दुनिया में पहचान बना रहा है। पर्यटन के क्षेत्र में प्रदेश ने नई ऊँचाइयाँ हासिल की हैं। हाल ही में जारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2024 में 13 करोड़ 41 लाख से अधिक पर्यटक मध्यप्रदेश पहुंचे, जो एक ऐतिहासिक रिकॉर्ड है।
प्रदेश की पर्यटन नीतियों, बुनियादी ढांचे और प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केन्द्र सरकार के सहयोग से पर्यटन उद्योग को नई दिशा मिली है। यही कारण है कि मध्यप्रदेश अब वैश्विक पर्यटन नक्शे पर ध्रुव तारे की तरह चमक रहा है।
वन्यजीव पर्यटन में बाघों की सबसे अधिक संख्या, पालपुर कूनो में चीतों का संरक्षण, चंबल की स्वच्छ धारा, सांची-खजुराहो-भीमबेटका जैसी विश्व धरोहरें, महाकाल लोक, रामराजा मंदिर ओरछा और ग्वालियर किले का ऐतिहासिक महत्व प्रदेश को विशिष्ट पहचान देते हैं।
पर्यटन के नये आयामों में फिल्म पर्यटन, ग्रामीण पर्यटन, कृषि पर्यटन और होम-स्टे को बढ़ावा मिला है। प्रदेश के 100 पर्यटन ग्रामों में से 63 ग्राम विकसित हो चुके हैं। यहां 470 से अधिक होम-स्टे संचालित हो रहे हैं। इससे स्थानीय लोगों को रोजगार और संस्कृति को वैश्विक पहचान मिल रही है।
रीवा पर्यटन कॉन्क्लेव में तीन हजार करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले हैं, जो इस बात का प्रमाण है कि निवेशकों का भरोसा भी पर्यटन उद्योग पर लगातार बढ़ रहा है। पीएमश्री पर्यटन वायु सेवा के माध्यम से भोपाल, इंदौर, जबलपुर, रीवा, सतना और सिंगरौली के बीच हवाई संपर्क ने पर्यटकों की सुविधा को और सुलभ बनाया है।
धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण के लिए ‘लोक’ परियोजनाएं तेजी से विकसित की जा रही हैं। उज्जैन में महाकाल लोक, अमरकंटक में माँ नर्मदा महालोक, ओरछा में श्रीरामराजा लोक और महू में श्री परशुराम लोक जैसे स्थलों से प्रदेश में आध्यात्मिक पर्यटन का विस्तार हो रहा है।
प्रदेश सरकार का लक्ष्य है कि पर्यटन क्षेत्र को सबसे बड़े रोजगार सृजन उद्योग के रूप में विकसित किया जाए। स्थानीय समुदाय की भागीदारी और राज्य की दूरदर्शी नीतियों से मध्यप्रदेश आने वाले समय में भारत ही नहीं, विश्व का शीर्ष पर्यटन केंद्र बनने की ओर अग्रसर है।

