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मध्यप्रदेश में सिंचाई क्षमता में तेज़ वृद्धि — नदियों को जोड़ने की तैयारी, 2026 तक 8.44 लाख हेक्टेयर अतिरिक्त सिंचाई क्षमता

मध्यप्रदेश में सिंचाई क्षमता में तेज़ वृद्धि — नदियों को जोड़ने की तैयारी, 2026 तक 8.44 लाख हेक्टेयर अतिरिक्त सिंचाई क्षमता

भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश में पिछले दो वर्षों में 7.31 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में नई सिंचाई क्षमता विकसित की गई है। वर्ष 2026 तक प्रदेश की सिंचाई क्षमता में 8.44 लाख हेक्टेयर की और वृद्धि होने जा रही है। मध्यप्रदेश का लक्ष्य सिंचाई क्षेत्र को 100 लाख हेक्टेयर तक पहुँचाना है। मुख्यमंत्री मंगलवार को विधानसभा समिति कक्ष में जल संसाधन एवं नर्मदा घाटी विकास विभाग की समीक्षा कर रहे थे।

मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश की सिंचाई परियोजनाओं की समीक्षा अब प्रधानमंत्री गतिशक्ति पोर्टल के माध्यम से की जाएगी, जिससे बड़े प्रोजेक्ट्स की निगरानी अधिक प्रभावी ढंग से होगी। उन्होंने पार्वती-काली-सिंध और चंबल इंटर-स्टेट लिंक, केन-बेतवा लिंक परियोजनाओं को प्रदेश की ऐतिहासिक उपलब्धि बताया और राज्य में नदियों को जोड़ने के लिए नदी जोड़ो परियोजना के क्रियान्वयन के निर्देश दिए।

अधिकारियों ने बताया कि राज्य में विभिन्न नदी लिंक परियोजनाओं का सर्वे पूरा कर लिया गया है। इनमें उज्जैन जिले में कान्ह-गंभीर, मंदसौर–नीमच–उज्जैन में कालीसिंध-चंबल, सतना में केन–मंदाकिनी, सिवनी–छिंदवाड़ा में शक्कर–पेंच–दूधी तामिया, और रायसेन में जामनेर–नेवन तथा नेवन–बीना का सर्वे शामिल है। इन सभी परियोजनाओं के क्रियान्वयन से कुल 5.97 लाख हेक्टेयर नए क्षेत्र में सिंचाई संभव होगी, जिसकी अनुमानित लागत करीब 9870 करोड़ रुपये है। सात जिलों के हजारों किसान इससे लाभान्वित होंगे।

राज्य की नदियों में जल प्रबंधन, बाढ़ नियन्त्रण और जल उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से 13 नवंबर 2024 को एक उच्च स्तरीय तकनीकी दल का गठन किया गया था। मुख्यमंत्री ने भोपाल की प्राचीन झील प्रणाली का अध्ययन कर उसी आधार पर कम लागत वाले सुरक्षित जलाशय और बांध मॉडल विकसित करने के निर्देश भी दिए। विभाग को इस मॉडल का प्रदर्शन तैयार करने के लिए कहा गया।

बैठक में बताया गया कि जल संसाधन विभाग व NVDA द्वारा कई परियोजनाएँ तेजी से प्रगति पर हैं। उज्जैन की सेवरखेड़ी–सिलारखेड़ी परियोजना (लागत 614.53 करोड़) की प्रगति 48% है, जबकि कान्ह डायवर्सन क्लोज डक्ट परियोजना (लागत 919.94 करोड़) 42% प्रगति पर है। सिंहस्थ 2028 को ध्यान में रखते हुए घाट निर्माण और अन्य सुविधाओं पर 778.91 करोड़ रुपये की परियोजनाएँ चल रही हैं।

बैठक में जल संसाधन मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट, मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।


मुख्य बिंदु

  • दो वर्षों में 7.31 लाख हेक्टेयर नई सिंचाई क्षमता विकसित।

  • वर्ष 2026 तक 8.44 लाख हेक्टेयर अतिरिक्त क्षमता बढ़ेगी।

  • लक्ष्य: प्रदेश की कुल सिंचाई क्षमता 100 लाख हेक्टेयर।

  • सिंचाई परियोजनाओं की समीक्षा अब पीएम गतिशक्ति पोर्टल से।

  • राज्य में नदी जोड़ो परियोजना के व्यापक सर्वे पूरे।

  • नदी लिंक परियोजनाओं से 5.97 लाख हेक्टेयर में सिंचाई संभव, लागत 9870 करोड़।

  • सात जिलों के हजारों किसानों को लाभ।

  • जल प्रबंधन हेतु 13 नवंबर 2024 को तकनीकी दल का गठन।

  • भोपाल की झील मॉडल पर सुरक्षित जलाशय व बांध निर्माण की अवधारणा।

  • उज्जैन की दो प्रमुख परियोजनाएँ प्रगति पर: सेवरखेड़ी–सिलारखेड़ी (48%), कान्ह डायवर्सन (42%)।

  • सिंहस्थ 2028 के लिए घाट निर्माण हेतु 778.91 करोड़ की परियोजनाएँ।


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