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“मन की बात” में प्रधानमंत्री श्री मोदी ने की ‘सकारात्मक सोच’ और बुंदेलखंड के किलों की सराहना

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम “मन की बात” के 124वें संस्करण में मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक और सामाजिक उपलब्धियों का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने राजधानी भोपाल की महिला स्वच्छता टीम ‘सकारात्मक सोच’ के कार्यों की सराहना करते हुए देशवासियों से प्रेरणा लेने का आह्वान किया। साथ ही, बुंदेलखंड के ऐतिहासिक किलों की अद्वितीय विरासत को रेखांकित करते हुए कहा कि ये धरोहरें भारत की गौरवशाली संस्कृति की प्रतीक हैं।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोपाल के वार्ड क्रमांक 50, गुलमोहर कॉलोनी स्थित शील पब्लिक स्कूल में स्थानीय रहवासियों के साथ “मन की बात” कार्यक्रम का श्रवण किया। कार्यक्रम के उपरांत उन्होंने उपस्थित नागरिकों के साथ बरगद का पौधा लगाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा मध्यप्रदेश की उपलब्धियों की सराहना “दिव्य ऊर्जा और नवसंकल्प से अभिभूत करने वाली” है। उन्होंने कहा कि श्री मोदी जन-जन की शक्ति को राष्ट्र के नव निर्माण के लिए प्रेरित करते हैं। ऑपरेशन सिंदूर की सफलता और कारगिल विजय दिवस के उल्लेख को उन्होंने देश की सुरक्षा और सामर्थ्य का प्रतीक बताया।

मुख्यमंत्री ने यह भी जानकारी दी कि भोपाल की सीमा से लगे रायसेन जिले में 10 अगस्त को विशाल रेल कोच निर्माण इकाई का भूमिपूजन किया जाएगा, जो प्रदेश के औद्योगिक विकास में मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार रोजगार और स्वावलंबन को प्राथमिकता दे रही है, और मेहनतकशों के लिए “उद्योगों को मंदिर” बनाने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है।

इसके अतिरिक्त, उन्होंने रातापानी अभयारण्य को “विश्व में अनूठा” बताया और इसके संरक्षण तथा पर्यटन की दृष्टि से संभावनाओं पर बल दिया।

प्रधानमंत्री श्री मोदी ने मन की बात कार्यक्रम में कहा कि” भोपाल की एक टीम का नाम ‘सकारात्मक सोच’ है, इसमें 200 महिलाएं हैं। ये सिर्फ सफ़ाई नहीं करती, सोच भी बदलती हैं। एक साथ मिलकर शहर के 17 पार्कों की सफ़ाई करना, कपड़े के थैले बाँटना, इनका हर कदम एक संदेश है। ऐसे प्रयासों की वजह से ही भोपाल भी अब स्वच्छ सर्वेक्षण में काफी आगे आ गया है। साथ ही प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा कि “बुन्देलखंड में ऐसे कई किले हैं, ग्वालियर, झांसी, दतिया, अजयगढ़, गढ़कुंडार, चंदेरी। ये किले सिर्फ ईंट-पत्थर के नहीं हैं, ये हमारी संस्कृति के प्रतीक हैं। संस्कार और स्वाभिमान, आज भी इन किलों की ऊंची-ऊंची दीवारों से झांकते हैं। मैं सभी देशवासियों से आग्रह करता हूँ कि इन किलों की यात्रा करें, अपने इतिहास को जानें, गौरव महसूस करें।”

मन की बात देशवासियों से सीधा संवाद

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मन की बात कार्यक्रम सुनने के लिए एकत्र हुए स्थानीय रहवासियों को संबोधित करते हुए कहा कि यशस्वी प्रधानमंत्री श्री मोदी का मन की बात कार्यक्रम, देशवासियों से सीधा संवाद स्थापित करने का प्रभावी माध्यम बन गया है और इससे देशभर की प्रेरणादायक जानकारियां मिलती हैं, जो राष्ट्र निर्माण के मार्ग में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। असम के काजीरंगा पार्क में हो रही पक्षियों की गणना हो या गुप्त गोदावरी में चल रहा स्वच्छता अभियान, मन की बात कार्यक्रम से जनता की इस तरह की पहल से पूरा देश अवगत होता है।

जियो और जीने दो की संस्कृति

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भोपाल ने स्वच्छता में रैंकिंग से जो अपनी पहचान बनाई है उसके लिए भोपाल वासी बधाई के पात्र हैं। भोपाल के रातापानी अभयारण को डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर नाम दिया गया है, यह अभयारण अपने आप में विशिष्टता लिए हुए हैं। नगरीय बसाहट के 15 किलोमीटर दूरी पर टाइगर अभयारण होना विश्व में अनूठा है। यह ‘जियो और जीने दो’ की संस्कृति व वन्य प्राणी और मनुष्य के सह अस्तित्व की भावना का जीवंत उदाहरण है। यह बताता है कि हम समूची पृथ्वी को एक कुटुंब की तरह देखते हैं और प्रकृति के साथ परमात्मा को जोड़ते हुए “वसुधैव कुटुम्बकम” के भाव का पालन करते हैं।

बहनों को रक्षाबंधन पर शगुन

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सावन का महीना रक्षाबंधन का त्योहार लेकर आता है। राज्य सरकार ने इस अवसर पर लाड़ली बहना योजना के अंतर्गत रक्षाबंधन का त्यौहार मनाने के लिए अतिरिक्त रूप से 250 रुपए की राशि बहनों को शगुन के रूप में देने का निर्णय लिया है। प्रदेश की एक करोड़ 29 लाख बहनों के खाते में यह राशि डाली जाएगी। भारतीय संस्कृति में विद्यमान त्योहारों की परंपरा जीवन को सकारात्मक व आनंददाई बनाते हुए परिवार परंपरा को सशक्त करती है। हमारी संस्कृति मातृ प्रधान संस्कृति है, हम सृष्टि में भी माता का रूप देखते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा की सावन माह का प्रत्येक दिन, रक्षाबंधन के भाव से मनाया जाए। हमारे त्यौहार सामाजिक समरसता का प्रतीक है, इन्हें इसी भाव से मनाना चाहिए। इसीलिए सभी त्यौहारों को राज्य सरकार के माध्यम से मनाने का संकल्प लिया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश की माहेश्वरी और चंदेरी साड़ियों के उपयोग को प्रोत्साहित करने के लिए भी बहन-बेटियों को प्रेरित किया।

पर्यटन समिट में 3000 करोड़ का निवेश

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि क्षेत्रीय स्तर पर इन्वेस्टर समिट का क्रम निरंतर जारी है। शनिवार को रीवा में हुई पर्यटन समिट में 3000 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। रोजगार आधारित उद्योग लगाने पर राज्य सरकार, उद्योग समूहों को विशेष सहायता उपलब्ध करा रही है। कार्यक्रम में जिला अध्यक्ष श्री रविन्द्र यति, सामाजिक कार्यकर्ता श्री राहुल कोठारी, गुलमोहर रहवासी संघ के पदाधिकारी तथा स्थानीय नागरिक उपस्थित थे।

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