लोकतंत्र के महापर्व में जब बड़े-बड़े नेता सत्ता और रणनीति की बातें कर रहे हैं, तब 72 साल के एक किसान ने सबको हैरान कर दिया है। खेत-खलिहान की मिट्टी से जुड़ा यह बुजुर्ग किसान अब राजनीति में उतरकर खुद अपनी लड़ाई लड़ने को तैयार है। उनका कहना है कि वर्षों से किसानों की समस्याएं सुनते-सुनते थक चुका हूं, अब समाधान खुद करूंगा। नामांकन भरते समय उन्होंने जनता से वादा किया — “शिक्षा फ्री होगी, रोजगार बढ़ेगा और किसानों को उनका हक मिलेगा।”
