विकसित कृषि संकल्प अभियान के तहत हर दिन जनपदों की दो-दो पंचायतों में कार्यशालाएं आयोजित की जा रहीं है। इन कार्यशालाओं में कृषि विभाग के अलावा मत्स्य, उद्यानिकी, कृषि अभियांत्रिकी, पशुपालन और सहकारिता विभाग का अमला उपस्थित रहकर विभागों की नवीनतम योजनाओँ व जानकारियां प्रदान कर रहें है। शुक्रवार को वारासिवनी की ग्राम पंचायत कोचेवाही व लड्सड़ा में कटंगी में मानेगांव व मेहदुली, बालाघाट रट्टा व जरेरा, लांजी में बेलगांव व नेवारवाही, और बिरसा में सुन्दरवाही व अडोरी में कार्यशालाएं आयोजित हुई। कृषि उपसंचालक श्री राजेश खोब्रागड़े ने बताया कि अभियान के तहत जिले में धान उत्पादक किसानों की लागत कम करने तथा उत्पादन बढ़ाने की दिशा में नवीनतम तकनीकें साझा की जा रही है। शुक्रवार को विभाग और केवीके के वैज्ञानिकों तथा क्षेत्र के अमले द्वारा धान की डीएसआर विधि यानी सिड्रील द्वारा बुवाई के लाभ से सम्बंधित जानकारियां दी गई। इसके अलावा अन्य विभागों के अमले ने भी विभागीय योजनाओं के बारे में बताया। कार्यशाला के दौरान भुतपूर्व विधायक श्री ओमकार सिंह बिसेन, सरपंच श्रीमती सुनीता मंजय सोनकर,जनपद सदस्य श्री शंकरलाल इंवाते के अलावा कार्यक्रम प्रभारी श्री आरके शेंडे, कृषिववैज्ञानिक श्री डॉ.उत्तम बिसेन,मत्स्यपालन अधिकारी श्री मेश्राम,पशुचिकित्सा अधिकारी श्री घोडेस्वर, कृषि विस्तार अधिकारी श्री दिलेश खंडेलकर, श्री जीएन मेश्राम,उद्यान विभाग के श्री श्याम, पटवारी ललित बिसेन मौजूद रहें।
जिले 63 कस्टमर हायरिंग सेंटर पर उपलब्ध है सिड्रील मशीन
कृषि उपसंचालक श्री खोब्रागड़े ने बताया कि जिले में 63 कस्टमर हायरिंग सेंटर हो गए है। जो पूर्व में 47 थे, इन सभी सेंटर पर सिड्रील मशीन उपलब्ध है। किसान इन केंद्रों से मशीन प्राप्त कर सकते है। यहां 1200 रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से किराए से प्राप्त की जा सकती है। इसके उपयोग से धान की लागत कम और समय भी कम लगता है। वारासिवनी भूतपूर्व विधायक श्री बिसेन ने डीएसआर विधि से बोनी का खेतपाठशाला के माध्यम से प्रैक्टिकल करने का अनुरोध भी किया। साथ ही कृषि वैज्ञानिक डॉ. बिसेन ने फसलों में व्यधि, खरपतवार, डीएसआर , कृषि यंत्र, बीज उत्पादन के सम्बंध में विस्तृत जानकारी दी।
