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नियोक्ताओं और कर्मचारियों के पंजीकरण को मिलेगा प्रोत्साहन

कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) ने नियोक्ताओं और कर्मचारियों के पंजीकरण को बढ़ावा देने के लिए “स्प्री 2025” यानि स्कीम टू प्रमोट रजिस्ट्रेशन ऑफ इम्प्लॉयर्स/इम्प्लॉयीज योजना को स्वीकृति दी है। इस निर्णय की घोषणा शिमला, हिमाचल प्रदेश में आयोजित 196वीं ईएसआई निगम की बैठक में की गई, जिसकी अध्यक्षता केंद्रीय श्रम और रोजगार तथा युवा मामले और खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने की।

संयुक्त निदेशक श्री निश्चल कुमार नाग, प्रभारी, उप क्षेत्रीय कार्यालय, भोपाल से प्राप्त जानकारी के अनुसार स्प्री योजना का उद्देश्य ईएसआई अधिनियम, 1948 के अंतर्गत अब तक पंजीकृत नहीं हुए प्रतिष्ठानों एवं श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाना है। यह योजना 1 जुलाई से 31 दिसंबर 2025 तक लागू रहेगी। इसके अंतर्गत नियोक्ता डिजिटल माध्यमों जैसे- ESIC पोर्टल, श्रम सुविधा पोर्टल, MCA पोर्टल से अपने प्रतिष्ठान एवं कर्मचारियों का पंजीकरण कर सकते हैं। पंजीकरण नियोक्ता द्वारा घोषित तिथि से वैध माना जाएगा। पंजीकरण की तिथि से पूर्व की अवधि के लिए कोई देनदारी, योगदान या रिकॉर्ड की मांग नहीं की जाएगी और कोई निरीक्षण या कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी, जो पहले अपंजीकरण की स्थिति में संभावित थी।

स्प्री योजना का प्रमुख उद्देश्य पिछली देनदारियों के भय को समाप्त कर स्वैच्छिक अनुपालन को बढ़ावा देना है, इससे कॉन्ट्रेक्ट, अस्थायी और अनियमित श्रमिकों को भी स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा लाभ प्राप्त होंगे। इस योजना के अंतर्गत नकद लाभ (बीमारी, मातृत्व, चोट या मृत्यु की स्थिति में), कर्मचारियों एवं उनके परिवारों के लिए चिकित्सा सेवाएं, दीर्घकालिक सामाजिक सुरक्षा जैसे विकलांगता लाभ, पेंशन आदि लाभ उपलब्ध होंगे।

यह योजना उन नियोक्ताओं पर लागू होगी जिनके प्रतिष्ठानों यानि कारखानें, दुकानें, होटल-रेस्टोरेंट, रोड ट्रांसपोर्ट, निजी स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, समाचार पत्र, नगर निगमों के ठेका कर्मचारी आदि में 10 या अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं। ऐसे संस्थानों पर भी यह योजना लागू होगी जो अब तक ईएसआई अधिनियम के तहत पंजीकृत नहीं हुए हैं अथवा वह अपने सभी पात्र कर्मचारियों का पंजीकरण नहीं कर पाए हैं।

संयुक्त निदेशक श्री नाग ने बताया कि यह योजना सर्वसमावेशी सामाजिक सुरक्षा कवरेज को बढ़ावा देती है और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के लिये भी अनुकूल है। योजना की सबसे बड़ी विशेषता है कि यह पूरी तरह से स्वैच्छिक, सरल और पारदर्शी है। उन्होंने राज्य के सभी पात्र नियोक्ताओं से इस योजना का अधिकतम लाभ उठाने का आग्रह किया, जिससे वे न केवल कानूनी सुरक्षा सुनिश्चित कर सकें बल्कि अपने कर्मचारियों को आवश्यक स्वास्थ्य व सामाजिक संरक्षण भी प्रदान कर सकें।

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