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मंत्रि-परिषद द्वारा मुख्यमंत्री कन्या विवाह/निकाह योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिये संशोधनों को मंजूरी दी गई।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक मंगलवार को मंत्रालय में हुई। मंत्रि-परिषद द्वारा मुख्यमंत्री कन्या विवाह/निकाह योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिये संशोधनों को मंजूरी दी गई। योजना अंतर्गत कन्या तथा कन्या के अभिभावक गरीबी रेखा के नीचे जीवन निर्वाह करते हों, साथ ही इनका बी.पी.एल. पोर्टल पर सत्यापन अनिवार्य होगा। कन्या विवाह तथा निकाह सम्मेलन के लिये संभागवार वार्षिक चक्रीय रूप से कैलेण्डर जारी कर सामुहिक विवाह/निकाह कार्यक्रम का आयोजन किया जायेगा।

संभागवार जिलों मे आयोजित सामूहिक विवाह सम्मेलन में सम्मिलित विवाह जोड़ों की न्यूनतम संख्या 11 एवं अधिकतम 200 जोड़ों की निर्धारित की गयी है। योजना में सामूहिक विवाह/निकाह सम्मेलनों में प्राप्त आवेदनों की स्क्रूटनी पूर्व अनुसार निकाय स्तर पर की जायेगीं। पात्र/अपात्र एवं समग्र पोर्टल पर वर-वधू की आधार ई-केवायसी अनिवार्य होगा। सामूहिक विवाह कार्यक्रमों के लिये शासन की ओर से मिलने वाले आर्थिक लाभ को सार्थक बनाने का प्रयास करते हुये आयोजन में जन-प्रतिनिधियों एवं अन्य सामाजिक संस्थाओं की भागीदारी सुनिश्चित कर समाज के संपन्न और सक्षम व्यक्तियों का सहयोग प्राप्त किया जायेगा।

मुख्यमंत्री कन्या विवाह एवं निकाह योजना में प्रति कन्या राशि 55 हजार रूपये में से वधू को राशि रूपये 49 हजार का एकाउन्ट पेयी चेक और शेष 6 हजार रुपये सामूहिक विवाह समारोह आयोजन के लिए संबंधित निकाय को प्रदाय किया जायेगा। सहायता राशि रुपये 49 हजार डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डी.बी.टी.) के माध्यम से वधू के खाते में एवं शेष 6 हजार रूपये आयोजन की व्यवस्थाओं पर व्यय के लिए प्रदाय की जायेगी।

टाइगर रिजर्व के बफर क्षेत्रों के विकास के लिए 145 करोड़ रूपये की सैद्धांतिक स्वीकृति

मंत्रि-परिषद द्वारा वित्तीय वर्ष 2025-26 से 2027-28 के लिए नवीन योजना “टाइगर रिजर्व के बफर क्षेत्रों के विकास” के लिए 145 करोड़ रूपये की सैद्धांतिक स्वीकृति प्रदान की गयी। इस योजना में बफर क्षेत्रों में संवेदनशील क्षेत्रों में विभिन्न कार्य किए जाएंगे।

इस नवीन योजना में बफर क्षेत्रो में संवेदनशील क्षेत्रों में चेनलिंक फेसिंग का निर्माण किया जाएगा। वन्य प्राणियों की सुरक्षा एवं अग्नि सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। चारागाहों एवं जल स्त्रोतों का विकास किया जाएगा। वन्य प्राणियों का उपचार और स्वास्थ्य परीक्षण किया जाएगा। नागरिकों के कौशल उन्नयन के लिए प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।

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