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दिव्यांग खिलाड़ियों का हौसला बना मिसाल, “नॉट आउट @100” क्रिकेट महोत्सव का भव्य समापन

मंगुभाई पटेल ने कहा कि राष्ट्रीय दिव्यांगजन क्रिकेट खेल महोत्सव-2026 “नॉट आउट @100” केवल एक खेल आयोजन नहीं, बल्कि मानवीय संकल्प, आत्मविश्वास और अदम्य साहस के अद्भुत प्रदर्शन का मंच है। यह आयोजन आत्मसम्मान, आत्मनिर्भरता और सामाजिक समावेशन का उत्सव है।

राज्यपाल गुरुवार को पुलिस लाइन स्टेडियम में आयोजित महोत्सव के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे। प्रतियोगिता का आयोजन कुशाभाऊ ठाकरे न्यास, टास्क इंटरनेशनल, ध्यान-विज्ञान परमार्थ संस्थान और विवेकानंद विधिक न्याय केन्द्र के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।

राज्यपाल ने कहा कि नरेंद्र मोदी ने “विकलांग” शब्द के स्थान पर “दिव्यांग” शब्द का प्रयोग कर समाज की सोच में सकारात्मक परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त किया है। उन्होंने कहा कि मोदी जी ने खेल और खिलाड़ियों को परिवार के मुखिया की तरह सहयोग और प्रोत्साहन दिया है, जिसके कारण आज पूरा देश खेलों से जुड़ रहा है।

उन्होंने बताया कि गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए मोदी जी के मंत्रिमंडल में उन्हें 14 वर्ष तक काम करने का अवसर मिला और उस समय खेल प्रतियोगिताओं को व्यापक स्तर पर बढ़ावा दिया गया। उन्होंने खराब मौसम के कारण मैच नहीं देख पाने का अफसोस भी जताया, लेकिन सीधे विमानतल से कार्यक्रम में पहुंचकर खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया।

राज्यपाल ने समाजसेवी कुशाभाऊ ठाकरे को अपनी प्रेरणा बताते हुए कहा कि समाज सेवा के कार्यों में उनका मार्गदर्शन सदैव प्रेरणास्रोत रहा है।

समारोह में दिव्यांग कलाकारों की प्रस्तुति ने सभी को भावुक कर दिया। मंच पर दिव्यांग खिलाड़ी प्रियेश कुमार ने स्वरबद्ध काव्य पाठ प्रस्तुत किया, जिसकी राज्यपाल ने सराहना करते हुए कहा कि ईश्वर ने उन्हें दिव्य कंठ प्रदान किया है। वहीं दिव्यांग कलाकार सुश्री फाल्गुनी ने जन-गण-मन और वंदे मातरम् का गायन कर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। राज्यपाल ने उन्हें मंच पर बुलाकर पौधा और शॉल भेंट कर सम्मानित किया। अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी शैलेन्द्र यादव ने भी अपने विचार व्यक्त किए।

इस अवसर पर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष एवं विधायक हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि दिव्यांग खिलाड़ियों का हौसला अनुकरणीय है। 100 घंटे लगातार क्रिकेट खेलना अपने आप में अनूठा और प्रेरणादायक आयोजन है।

प्रतियोगिता के संयोजक डॉ. राघवेन्द्र शर्मा ने बताया कि इस महोत्सव में 6 प्रकार की दिव्यांगता के कुल 754 खिलाड़ियों ने भाग लिया, जिनमें 100 से अधिक महिला खिलाड़ी शामिल थीं। साथ ही 32 से अधिक अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों ने भी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।

समापन समारोह में इंडिया एशिया बुक के प्रतिनिधि ने इस प्रतियोगिता को विश्व कीर्तिमान के रूप में दर्ज करने की घोषणा की। कार्यक्रम के अंत में अतिथियों का शॉल और पौधा भेंट कर सम्मान किया गया तथा राज्यपाल को स्मृति-चिह्न के रूप में ट्रॉफी भेंट की गई।

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