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कांग्रेस युवा नेता और पुलिस आरक्षक के बीच मारपीट,

छतरपुर :- लड़की को छेड़ना पड़ा भारी ,बीच सड़क पर पुलिस वाले ने अपराधी को सिखाया सबक , वीडियो हुआ वायरल

social media पर एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें एक युवक और एक पुलिसकर्मी के बीच हाथापाई हो रही है वीडियो छतरपुर के सिविल लाइन थाना क्षेत्र के पन्ना रोड का बताया जा रहा है। वायरल वीडियो में आरोपी अजय प्रताप सिंह बघेल, जिला कांग्रेस के झुग्गी झोपड़ी प्रकोष्ठ का जिला उपाध्यक्ष है, सिविल लाइन पुलिस ने धारा 353,332,186,294,506 के अंतर्गत गिरफ्तार किया।।

पुलिस आरक्षक ने युवती को छेड़ने से रोका तो युवक गालिया देने लगा दोनों की आपस झड़प मे हो गई।
मारपीट लाइव विडियो आया सामने,कालेज की युवती को छेड़ रहे युवक को देख पुलिसकर्मी ने बहादुरी दिखाई। चौकाने बाली बात ये है कि जहां एक आरक्षक इतनी बहादुरी से एक युवती को बचाया है वही आने जाने वाले लोगो को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता लोग कितने स्वार्थी हो चुके है । ऐसे अपराधी खुले आम लडकियों को परेशान करते है और गुन्डागर्दी करके लोगो को परेशान करते है खुले आम लोग अपराध कर रहे है लेकिन रास्ते से आते जाते लोग इस कदर अंधे हो चुके है कि सामने हो रहे अपराध को भी अनदेखा कर देते है।
ऐसे मे अगर कोई उन लोगो का विरोध करता है उनसे अकेले भिडने के लिए तैयार है जो ऐसे लोग किसी हिरो से कम नहीं है जो एक असली
आरक्षक है वो यही है।
मनीष दुबे है, जो खजुराहो थाने मे पदस्त है, डाक लेकर छतरपुर आया था और अपने थाने क्षेत्र से बाहर होकर भी बीच सङक पर एक लङकी को बचाया और अकेले उस अपराधी से भिड़ गया जो एक महाविद्यालय की लड़की को परेशान कर रहा था। आरक्षक ने उस लड़की को बचाया और अपराधी से भिड़ा रहा आने जाने वाले लोग उसे देखते हुए निकलते रहे। आज न सिर्फ समाज को , शहर को , प्रदेश को बल्कि पूरे देश को ऐसे आरक्षकों की जरूरत है और साथ ही जरूरत है ऐसे लोगो को प्रोत्साहित करने की और उनका आत्मविश्वास बढ़ाने की।

सिविल लाइन थाने मे आरोपी लड़के के खिलाफ FIR दर्ज की जा रही है और जिसे जेल भेजा गया है।

आरोपी अजय प्रताप सिंह बघेल, जिला कांग्रेस के झुग्गी झोपड़ी प्रकोष्ठ का जिलाध्यक्ष है, सिविल लाइन पुलिस ने धारा 353,332,186,294,506 के अंतर्गत गिरफ्तार किया।

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मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि युवा शक्ति को मार्गदर्शन देने के लिए प्रदेश के युवाओं का कुंभ कराया जाए। इसे ज्ञान महाकुंभ नाम दिया जाए। उन्होंने कहा कि वर्ष में कम से कम एक बार महाविद्यालयों में बड़े वैज्ञानिकों को आमंत्रित किया जाए और विद्यार्थियों के साथ उनका जीवंत संवाद एवं समूह चर्चा आयोजित की जाए। इससे युवाओं के विज्ञान और तकनीक संबंधी ज्ञान में वृद्धि होगी। युवाओं में सामान्य ज्ञान बढ़ाने के लिए प्रदेश के हर संभाग में सामान्य ज्ञान की प्रतियोगिता कराएं। इससे हमारे युवा देश-दुनिया में हो रहे नवाचारों और नई जानकारियों से अवगत होते रहेंगे। उन्होंने कहा कि प्रदेश के सभी महाविद्यालयों की स्टेट लेवल पर ग्रेडिंग कराई जाए और तीन श्रेणियों में क्रमश: सर्वश्रेष्ठ महाविद्यालय, सर्वश्रेष्ठ प्राचार्य एवं सर्वश्रेष्ठ शिक्षक के रूप में पुरस्कृत करने की परम्परा भी प्रारंभ करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरूवार को मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन में उच्च शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। रोजगारपरक शिक्षा और शोध कार्यों को दें प्रोत्साहन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विभागीय अधिकारियों को भारतीय ज्ञान परम्पराओं पर आधारित रोजगारपरक शिक्षा दिए जाने पर जोर देते हुए कहा कि महाविद्यालयों में शोध केंद्र स्थापित कर शोध कार्यों को भी प्रोत्साहन दिया जाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश के सभी ऐसे क्षेत्रों में, जहां नए महाविद्यालय खोलने की अत्यंत आवश्यकता है, विशेषकर जनजातीय क्षेत्रों में, अधिकाधिक महाविद्यालय खोले जाएं। इससे जनजातीय वर्ग के विद्यार्थियों को निकट स्थान पर उच्च शिक्षा पाने का अवसर मिलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि उच्च शिक्षा के संदर्भ में वर्ष 2021-22 में हुए अखिल भारतीय सर्वेक्षण में मध्यप्रदेश का सकल नामांकन अनुपात (जीईआर) अखिल भारतीय औसत से अधिक आया है। इस क्षेत्र में अखिल भारतीय सकल नामांकन अनुपात 28.4 प्रतिशत है, जबकि मध्यप्रदेश 28.9 प्रतिशत आया है। उन्होंने कहा कि यह हमारे प्रयासों का परिणाम है। अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश के 55 जिलों के 1282 गोद लिए गए गाँवों में शिविर लगाकर विद्यार्थियों को जनजागरूकता गतिविधियों से जोड़ा गया है। प्रदेश में 384 शोध केंद्र संचालित हैं और जारी वित्त वर्ष में 100 नए शोध केंद्रों की स्थापना का लक्ष्य तय किया गया है। प्रदेश के 27 महाविद्यालयों को स्वशासी महाविद्यालय का दर्जा एवं 8 स्वशासी महाविद्यालयों को डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा देने का प्रस्ताव है। साथ ही 23 जिला मुख्यालयों में नए विधि महाविद्यालयों की स्थापना का लक्ष्य भी तय किया गया है। अधिकाधिक महाविद्यालयों में संचालित करें बीएससी एग्रीकल्चर पाठ्यक्रम मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश के अधिकाधिक महाविद्यालयों में बीएससी एग्रीकल्चर पाठ्यक्रम संचालित किए जाएं। इससे विद्यार्थियों की कृषि एवं कृषि आधारित प्र-संस्करण उद्योगों में रूचि बढ़ेगी। इस तरह का नवाचार करने के मामले में मध्यप्रदेश को मॉडल स्टेट बनाने का प्रयास करें। उन्होंने कहा कि इसके लिए अब तक चयनित हुए सभी महाविद्यालयों में इसी सत्र से बीएससी (कृषि) पाठ्यक्रम की पढ़ाई प्रारंभ करें। प्रदेश के सभी 55 जिलों प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस संचालित हैं, इनमें से 37 प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस महाविद्यालयों एवं 5 विश्वविद्यालयों में 7 प्रकार के रोजगार आधारित डिग्री एवं डिप्लोमा पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। इन पाठ्यक्रमों में करीब 1200 विद्यार्थी शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। दो शिफ्ट में कॉलेज लगाने के निर्देश, सेमेस्टर सिस्टम भी जारी रहे मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विभागीय अधिकारियों को महाविद्यालयों में दो शिफ्ट में अध्यापन कार्य संचालित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सेमेस्टर सिस्टम भी आवश्यकतानुसार जारी रहे। इससे विद्यार्थियों को बिना किसी बाधा के शिक्षा पूरी करने में आसानी होगी। उच्च शिक्षा मंत्री ने बताया कि हम विद्यार्थियों की दैनिक उपस्थिति को उनके क्रेडिट स्कोर से जोड़ रहे हैं, इससे विद्यार्थियों की उपस्थिति बढ़ रही है। शासकीय विश्वविद्यालयों में म.प्र. लोक सेवा आयोग से ही कराएं प्राध्यापकों की भर्ती मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पीएमश्री उत्कृष्टता महाविद्यालयों में अब तक की प्रगति और विकास की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि प्रदेश के सभी शासकीय विश्वविद्यालयों में प्राध्यापकों की भर्ती म.प्र. लोक सेवा आयोग के माध्यम से ही की जाए। राष्ट्रीय शिक्षा नीति – 2020 के अंतर्गत सेमेस्टर के माध्यम से परीक्षाओं के आयोजन की तैयारी करें। राष्ट्रीय शिक्षा नीति की टास्क फोर्स/शीर्ष समिति की बैठक में दिए गए निर्देशों का अक्षरश: पालन करें। विश्व बैंक प्रोजेक्ट में महाविद्यालय में कंप्यूटर लैब और अन्य सभी जरूरी विकास कार्य कराए जाएं। विकसित मध्यप्रदेश@2047 बैठक में उच्च शिक्षा, आयुष एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री श्री इंदर सिंह परमार ने बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के मार्गदर्शन में हम विकसित मध्यप्रदेश@2047 के तहत विद्यार्थियों को विश्वस्तरीय उच्च शिक्षा उपलब्ध कराने की ओर अग्रसर हैं। राज्य सरकार द्वारा युवाओं में उद्यमशीलता बढ़ाने के लिए नए पाठ्यक्रम संचालित करने का लक्ष्य तय किया गया है। इसी लक्ष्य की पूर्ति के लिए उच्च शिक्षा विभाग ने साम्यता एवं पहुंच, शोध एवं नवाचार, उन्नत तकनीकों का प्रभावी उपयोग कर विद्यार्थियों, महाविद्यालयों, संस्थाओं एवं शिक्षण प्रणाली के सुदृढ़ीकरण के मानक बिंदु तय कर लिए हैं। हम तय लक्ष्यों को पूरा करने के लिए तेजी से अग्रसर हैं। बैठक में मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव (मुख्यमंत्री कार्यालय) डॉ. राजेश राजौरा, अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा विभाग श्री अनुपम राजन, आयुक्त उच्च शिक्षा श्री निशांत वरवड़े सहित अन्य सभी विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

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