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पानी की बूंद-बूंद बचाने के लिए सनातन संस्कृति की पवित्र धारा का अभियान है जल गंगा संवर्धन : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जल गंगा संवर्धन अभियान हमारी सनातन संस्कृति की सबसे पवित्र धारा का अभियान है। जल की महत्ता ऐसी है कि इसके बिना कोई जीवित नहीं रह सकता है। शरीर 5 तत्वों से मिलकर बना है। ये सभी तत्व कभी अकेले नहीं रह सकते हैं। पानी के बिना जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुड़ी पड़वा, विक्रम संवत्, चेटीचंड, चैत्र नवरात्रि की बधाई देते हुए प्रदेश में तीसरे चरण के जल गंगा संवर्धन अभियान का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश नदियों का मायका है, जहां से 250 से अधिक नदियां निकलती हैं। मां नर्मदा के पवित्र जल से मध्यप्रदेश के साथ गुजरात में भी आनंद की धारा बह रही है। हमारी नदी जोड़ो परियोजनाओं का लाभ पड़ौसी राज्य राजस्थान और उत्तर प्रदेश को भी मिल रहा है। उन्होंने कहा कि जल संचय के अभियान में देशभर के जल स्त्रोतों के विकास कार्य करने का निर्णय लिया गया है। प्रदेश के तीसरे जल गंगा संवर्धन अभियान में 3 महीने तक लगातार जल संचय की गतिविधियां संचालित होंगी, जिसमें 2500 करोड़ की राशि से सभी विधानसभा, नगरीय निकायों और पंचायत स्तर पर जल संवर्धन और संचय के कार्य किए जाएंगे। हमारी सरकार ने पहले वर्ष में 30 दिन, दूसरे वर्ष में 120 दिन चलाया और मौजूदा तीसरे वर्ष में गुड़ी पड़वा से गंगा दशहरा तक 139 दिनों तक प्रदेश में जल गंगा संवर्धन अभियान चलाया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरुवार को इंदौर के इस्कॉन मंदिर में आयोजित तीसरे राज्य स्तरीय जल गंगा संवर्धन अभियान के शुभारंभ कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

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