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सड़क दुर्घटना को रोकने जिला प्रशासन का अहम कदम* *1 सप्ताह में आवारा पशुओं को गौशालाओं में शिफ्ट करने के आदेश*, *नहीं तो होगी बड़ी कार्यवाही* *सड़क दुर्घटनाओं से पशु एवं जनहानि को रोकने धारा 163 के तहत जिला मजिस्ट्रेट ने जारी किया आदेश*

*सड़क दुर्घटना को रोकने जिला प्रशासन का अहम कदम* *1 सप्ताह में आवारा पशुओं को गौशालाओं में शिफ्ट करने के आदेश*, *नहीं तो होगी बड़ी कार्यवाही* *सड़क दुर्घटनाओं से पशु एवं जनहानि को रोकने धारा 163 के तहत जिला मजिस्ट्रेट ने जारी किया आदेश*

 

*सड़क दुर्घटना को रोकने जिला प्रशासन का अहम कदम*

*1 सप्ताह में आवारा पशुओं को गौशालाओं में शिफ्ट करने के आदेश*, *नहीं तो होगी बड़ी कार्यवाही*

*सड़क दुर्घटनाओं से पशु एवं जनहानि को रोकने धारा 163 के तहत जिला मजिस्ट्रेट ने जारी किया आदेश*

*नेशनल और स्टेट हाईवे, शहरी एवं ग्रामीण सड़कों पर पशु छोड़ने पर पालकों पर होगी कार्यवाही*

*आदेश के उल्लंघन पर संबंधित अधिकारी पर विभागीय एवं अभियोजन की कार्यवाही होगी*

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कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट पार्थ जैसवाल ने छतरपुर जिले में सड़क दुर्घटना एवं वाहन दुर्घटनाओं तथा इससे होने वाली पशु एवं जनहानि को रोकने के संबंध में प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किया है। जिला प्रशासन का यह आदेश सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के संबंध में अहम कदम है। पशुओं एवं गोवंश की समुचित सुरक्षा एवं देखभाल की दृष्टि से खुली सड़कों पर पशुओं एवं गौवंशों को छोड़ने एवं बैठने के सम्बंध में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 163 (1) के तहत प्रतिबंधित किया है। यह आदेश जिले की राजस्व सीमाओं के भीतर लागू किया गया है।

आदेशानुसार जिले में नेशनल हाईवे, स्टेट हाइवे, प्रमुख जिला मार्गों तथा ग्राम सड़क एवं शहर के वार्ड की सड़कों पर कोई भी पालक अपने पशु, गौवंश को खुले में नहीं छोड़ेगा। जो पालक स्वयं के दूध के उपयोग के लिए पशु पालन कर रहे है, वे अपने पशु, गौवंश अपने कैम्पस के अन्दर ही रखेंगे। ये पशु, गौवंश नेशनल हाईवे, स्टेट हाइवे, प्रमुख जिला मार्गों तथा ग्राम सड़क एवं शहर के वार्ड की सड़कों एवं सार्वजनिक स्थलों पर न आने पाए ऐसा सभी पशु पालक सुनिश्चित करेंगे।

*जनपद, निकाय एवं पंचायतों को आवश्यक निर्देश*

सभी सीईओ जनपद पंचायत, सीएमओ नगरीय निकाय, ग्राम पंचायत सरपंच, सचिव, रोजगार सहायक अपने अपने कार्यक्षेत्र में आने वाली सड़कों, सार्वजनिक स्थलों पर पाए जाने वाले निराश्रित पशु, गोवंश को एक सप्ताह के अन्दर नजदीकी गौशालाओं में रखे जाने की कार्यवाही सुनिश्चित करेंगे। जिले में निजी संस्थाओं द्वारा संचालित गौशालाओं तथा ग्राम पंचायतों द्वारा संचालित गौशालाओं एवं नगरपालिकाओं द्वारा संचालित गौशालाओं की जानकारी भी संबंधित को उपलब्ध कराई गई है।

*पशु अधिकारियों को प्रतिदिन गौशालाओं का निरीक्षण कर जियो टैगिंग करने के निर्देश*

उप संचालक पशुपालन एवं सहायक पशु चिकित्सा अधिकारी संबंधित गौशालाओं का प्रतिदिन निरीक्षण करेंगे तथा गौशाला में प्रवेश होने वाली गौवंशो के रखे जाने की पंजी संधारित कराएंगे तथा टैगिंग सुनिश्चित करेंगे।

गौशाला में प्रवेश के पश्चात् यदि कोई गौवंश पालक अपना गौवंश लेने आता है तो उनसे बगैर खुराक खर्चा एवं अर्थदण्ड के गौवंश पालक को वापिस नही सौंपा जाए। गौवंश एवं पालक की पहचान का रिकार्ड रखा जाए।

*एक हफ्ते में गौशालाओं में आवारा पशुओं को शिफ्ट नहीं करने पर होगी कार्यवाही*

सड़को में निराश्रित घूमने वाले पशु गौवंशो को यदि एक राप्ताह के अंदर संबंधित अधिकारियों द्वारा संबंधित गौशालाओं में रखे जाने की कार्यवाही नही की जाती है और सड़को में गौवंश घूमते पाये जाते है तो संबंधित के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही के साथ-साथ भारतीय न्याय संहिता की धारा 223 के प्रावधानों के अनुसार भी अभियोजन की कार्यवाही की जाएगी। साथ ही उल्लंघनकर्ता पशुपालकों के विरूद्ध भी भारतीय न्याय संहिता की धारा 223 के प्रावधानों के अनुसार अभियोजन की कार्यवाही की जाएगी। यह आदेश आगामी दो माह तक प्रभावशील रहेगा।

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