समुद्री क्षेत्र के सतत विकास के लिए जानकारी के अनुप्रयोग पर ध्यान केंद्रित करते हुए सागरमंथन का सफलतापूर्वक हुआ समापन
हम 2047 तक विकसित भारत के विजन को साकार करने का प्रयास कर रहे हैं, ऐसे में सागरमंथन जैसे संवाद समृद्ध भविष्य के लिए आम सहमति और साझेदारी बनाने में बेहद अहम हैं: प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदीभारत 2030 तक दुनिया के शीर्ष 10 जहाज निर्माताओं में शामिल हो जाएगा: श्री सर्बानंद सोनोवाल
21वीं सदी में महासागर व्यापार का स्वरूप ग्लोबल साउथ तय करेगा: श्री सर्बानंद सोनोवाल
स्थायित्व भारत की समुद्री नीति का एक स्तंभ है और हमारा विजन भारत को दुनिया की जहाज निर्माण राजधानी बनाना है: श्री सोनोवाल
भारत सरकार के पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय (एमओपीएसडब्लू) द्वारा ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ओआरएफ) के सहयोग से आयोजित पहल ‘सागरमंथन – द ग्रेट ओशन्स डायलॉग’ के प्रथम संस्करण का आज यहां सफलतापूर्वक समापन हुआ। इस दौरान आयोजित सत्रों में इस बात पर चर्चा और परीक्षण किया गया कि साझेदारी कैसे विकसित की जा सकती है और उसे कैसे आगे बढ़ाया जा सकता है।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित किए गए प्रथम समुद्री कार्यक्रम – ‘सागरमंथन – द ग्रेट ओशन्स डायलॉग’ के सफल आयोजन पर अपना संदेश साझा किया। प्रधानमंत्री ने सागरमंथन की सफलता का आह्वान करते हुए मानवता के समृद्ध भविष्य की साझेदारी की दिशा में आम सहमति बनाने पर जोर दिया।

आमने-सामने की बातचीत के दौरान केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा, “भारत का विजन 2030 तक एक प्रमुख समुद्री राष्ट्र बनने का है, जैसा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने सोचा है। इस क्षेत्र में आधुनिकीकरण, डिजिटलीकरण और मशीनीकरण को बढ़ावा देने के हमारे निरंतर प्रयासों की बदौलत हमने अकुशलता की समस्याओं को दूर किया है, जो अब अतीत की बात हो गई है। यह देखते हुए कि भारत में एक प्रमुख जहाज निर्माण राष्ट्र बनने के लिए समृद्ध प्रतिभा पूल के साथ-साथ संसाधन भी हैं, हम 2030 तक जहाज निर्माण करने वाले शीर्ष 10 देशों में जगह बनाने का लक्ष्य बना रहे हैं, जबकि 2047 तक दुनिया के शीर्ष 5 बनने की दिशा में काम कर रहे हैं। यह हमारे प्रधानमंत्री प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के आत्मनिर्भर भारत के विजन को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। सागरमंथन के दूसरे दिन के उद्घाटन सत्र में मंत्री महोदय के इन बयानों से कार्यक्रम का बेहतर माहौल तैयार हो गया। इस बातचीत का संचालन ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ओआरएफ) के अध्यक्ष समीर सरन ने किया।
केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कल रात थिंक टैंक समुदाय के साथ मंत्रिस्तरीय रात्रिभोज गोलमेज सम्मेलन में मुख्य भाषण भी दिया। उद्घाटन भाषण पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग राज्य मंत्री,शांतनु ठाकुर ने दिया, जबकि मिस्र के आर्थिक अध्ययन केंद्र के कार्यकारी निदेशक और अनुसंधान निदेशक, अबला अब्देल-लतीफ, यूएसए के एलिसन सेंटर फॉर नेशनल सिक्योरिटी में नौसेना युद्ध और उन्नत प्रौद्योगिकी के वरिष्ठ अनुसंधान फेलो ब्रेंट सैडलर; अमेरिका के द हेरिटेज फाउंडेशन में स्ट्रोब टैलबोट सेंटर फॉर सिक्योरिटी के वरिष्ठ फेलोब्रूस जोंस; कोरिया गणराज्य के कोरिया मैरीटाइम इंस्टीट्यूट के वरिष्ठ अनुसंधान फेलो जुंगहो नाम; ग्रीस के सर्किल द मेड फोरम के वरिष्ठ कार्यक्रम अधिकारी कोंस्टेनटिनोस फाउट्ज़ोपोलोस; भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (आईडब्ल्यूएआई) के अध्यक्ष विजय कुमार ने धन्यवाद ज्ञापन दिया।
यूरो एफ्रो एशियाई सेंचुरी: भविष्य के विकास के मुख्य क्षेत्रों को जोड़ने वाले सत्र में, पुर्तगाल के फोरम ओशियनो के महासचिव रुबेन ईरास ने ‘डिजिटलीकरण और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अनुप्रयोगों के साथ इसके एकीकरण के महत्व के बारे में जानकारी दै, ताकि मार्गों को अनुकूलित किया जा सके और साथ ही उन्नत पोत गतिशीलता को बढ़ावा मिले।’ ईरास ने यह भी स्वीकार किया कि भारत किस तरह अंतर्देशीय जलमार्गों का विकास कर रहा है और इस विकास से अन्य देश कैसे लाभान्वित हो सकते हैं। इस कार्यक्रम में, विशेषज्ञों ने दुनिया की आपूर्ति लाइनों को बाधित किए बिना हरित समाधान खोजने की दिशा में बुद्धिमत्ता का उपयोग किया। ऑस्ट्रेलिया के वोलोंगोंग विश्वविद्यालय में ऑस्ट्रेलियाई राष्ट्रीय महासागर संसाधन और सुरक्षा केंद्र के व्याख्याता, दाउून जंग ने इस बात पर जोर दिया कि वैकल्पिक ईंधन के उपयोग के लिए नियम विकसित करने की आवश्यकता है। ‘ऊर्जा और नौवहन: सतत व्यापार के लिए एक मार्ग तैयार करना’ सत्र के दौरान, डेनमार्क के ग्लोबल मैरीटाइम फोरम के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जोनाथन क्रिस्टेंसन ने व्यापक रूपरेखा के रूप में उपलब्धता, सामर्थ्य और स्वीकार्यता का सुझाव दिया। उन्होंने आगे कहा कि ईंधन के रूप में भारत द्वारा ग्रीन अमोनिया का उपयोग दुनिया के लिए सीखने वाला अनुभव हो सकता है। बेल्जियम के एंटवर्प-ब्रुगेस बंदरगाह के उपाध्यक्ष ल्यूक अर्नौट्स ने बताया कि सरकारों को ग्रे और ग्रीन शिपिंग के बीच के अंतर को कैसे पाटना चाहिए।

सागरमंथन में एक और दिलचस्प सत्र का शीर्षक था ‘समुद्र में श्रम पर पुनर्विचार: स्थायी असमानताओं पर काबू पाना’, जिसमें फिलीपिंस के योजना और नीति, समुद्री उद्योग प्राधिकरण के निदेशक लुइसिटो डेलोस सैंटोस ने बताया कि नाविकों के साथ न्यायपूर्ण और मानवीय व्यवहार कितना महत्वपूर्ण है। नॉर्वेजियन शिपऑनर्स एसोसिएशन, नॉर्वे के कार्यकारी निदेशक हेलेन टोफ़्ट ने वश्विक विनियमन की आवश्यकता का तर्क देते हुए कहा कि शिपिंग एक वैश्विक व्यवसाय है। भारत के नौवहन महानिदेशालय के महानिदेशक श्याम जगन्नाथन ने दुनिया के तीसरे सबसे बड़े समुद्री देश के रूप में भारत की क्षमता पर प्रकाश डालते हुए परिदृश्य को स्थापित किया। उन्होंने यह भी बताया कि सरकार ने ‘सागर में सम्मान’ के माध्यम से समुद्र में महिलाओं के लिए संस्थागत समर्थन कैसे लागू किया है।
दुनिया में जहाज निर्माण में अग्रणी देश बनने की भारत की चाहत में नीदरलैंड, पनामा, नॉर्वे, मिस्र, ऑस्ट्रेलिया के वैश्विक विशेषज्ञों ने जहाज निर्माण के विभिन्न पहलुओं पर अग्रणी भारतीय समुद्री विशेषज्ञों के साथ चर्चा की। इस सत्र में इस बात पर चर्चा की गई कि वैश्विक जहाज निर्माण में लचीलापन और विकेंद्रीकृत उत्पादन को बहाल करना क्यों आवश्यक है, जहाज निर्माण उद्योग में नवाचार को प्रोत्साहित करने और प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने के लिए विभिन्न रूपरेखाएँ और कैसे दुनिया के बाकी देश दुनिया के अग्रणी जहाज निर्माण देशों से जहाज निर्माण के सर्वोत्तम अभ्यास सीख सकते हैं। नेस्ट्रा, नीदरलैंड के पार्टनर हैरी डी लीजर ने कहा कि लागत पर परिचालन को कम करने के लिए समाधानों पर विचार किया जाना चाहिए, जबकि उपलब्धता और सामर्थ्य पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। पनामा के मैरीटाइम चैंबर के अध्यक्ष जोस डिगेरोनिमो ने भी इस बात पर जोर दिया कि बेड़े के आधुनिकीकरण के लिए भारत के साथ सहयोग कितना महत्वपूर्ण है। नॉर्वे के नॉर्वेजियन शिपऑनर्स एसोसिएशन के सलाहकार लाइन ओलेस्टेड ने इस बात की पुष्टि की कि भारत कैसे अवसर प्रदान करता है क्योंकि ‘नॉर्वे को गहरे समुद्र में जहाजों की आवश्यकता है।’
‘सागरमंथन – द ग्रेट ओशन्स डायलॉग’ के सत्रों में स्वीडन के पूर्व प्रधानमंत्री और यूरोपीय विदेश संबंध परिषद के सह-अध्यक्ष कार्ल बिल्ड्ट, ट्यूनीशिया के पूर्व प्रधानमंत्री मेहदी जोमा, ट्यूनीशिया के पूर्व प्रधानमंत्री मेहदी जोमा जैसे कई विश्व नेताओं ने भी अपनी बात सामने रखी।
समुद्री क्षेत्र को लेकर अपनी तरह के पहले विचार नेतृत्व कार्यक्रम के रूप में पहचाने जाने वाले ‘सागरमंथन – द ग्रेट ओशन्स डायलॉग’ को चार केंद्रीय विषयों के इर्द-गिर्द डिजाइन किया गया है, जो हैं न्यू फ्रंटियर्स, प्रगति के लिए ब्लू ग्रोथ पार्टनरशिप, ग्रीन एंड ब्लू, और कोस्ट एंड कम्युनिटीज। न्यू फ्रंटियर्स एक गतिशील दुनिया में कनेक्टिविटी, बुनियादी ढांचे और विकास के आसपास के विषयों का पता लगाएगा। दूसरे विषय, ब्लू ग्रोथ का मकसद प्रगति के लिए साझेदारी को बढ़ावा देना है। ग्रीन एंड ब्लू थीम स्थिरता, प्रौद्योगिकी और नवाचार के महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करेगी। चर्चा समुद्री शासन और सामाजिक प्रभाव के इर्द-गिर्द भी घूमेगी, जिसे कोस्ट एंड कम्युनिटीज थीम के तहत कवर किया गया।
भारत का समुद्री क्षेत्र इसके व्यापार और वाणिज्य की रीढ़ के रूप में कार्य करता है, जो वॉल्यूम के हिसाब से देश के व्यापार का लगभग 95% और वैल्यू के हिसाब से 70% हिस्सा संभालता है। 12 प्रमुख बंदरगाहों और 200 से अधिक अधिसूचित छोटे और मध्यवर्ती बंदरगाहों के साथ, देश का बंदरगाह बुनियादी ढांचा इसकी बढ़ती अर्थव्यवस्था का आधार है। दुनिया के सोलहवें सबसे बड़े समुद्री राष्ट्र के रूप में, भारत वैश्विक नौवहन लेन पर एक अहम स्थान रखता है। पूर्वी एशिया और अमेरिका, यूरोप और अफ्रीका जैसे गंतव्यों के बीच यात्रा करने वाले अधिकांश मालवाहक जहाज भारतीय जल क्षेत्र से होकर गुजरते हैं, जो देश के सामरिक महत्व को दर्शाता है। इस क्षेत्र का योगदान व्यापार से इतर है। भारत के पास 2023 तक अपने झंडे के नीचे नौकायन करने वाले 1,530 जहाजों का बेड़ा था, जो वैश्विक नौवहन में इसकी बढ़ती उपस्थिति का प्रमाण है। इसके अतिरिक्त, देश टन भार के हिसाब से देखें तो भारत जहाज़ों की रीसाइक्लिंग के मामले मेंदुनिया में तीसरा सबसे बड़ा देश है, जो टिकाऊ समुद्री प्रथाओं और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में इसकी भूमिका को रेखांकित करता है। यह प्रमुखता देश के बंदरगाह बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण और विस्तार के प्रयासों का पूरक है। वर्ष 2014-15 और 2023-24 के बीच, प्रमुख बंदरगाहों ने अपनी वार्षिक कार्गो-हैंडलिंग क्षमता को 871.52 मिलियन टन से बढ़ाकर 1,629.86 मिलियन टन कर दिया, जो 87.01% की प्रभावशाली वृद्धि को दर्शाता है। अकेले वित्तीय वर्ष 2024 के दौरान भारतीय बंदरगाहों ने 819.22 मिलियन टन कार्गो का प्रबंधन किया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 4.45% की वृद्धि दर्शाता है। यह वृद्धि माल निर्यात में वृद्धि के साथ मेल खाती है, जो वित्त वर्ष 2023 में बढ़कर 451 बिलियन अमरीकी डॉलर हो गया जबकि इससे पिछले वर्ष के दौरान यह 417 बिलियन अमरीकी डॉलर था।
