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स्वाधीनता आंदोलन में नाना साहेब पेशवा का संघर्ष इतिहास का स्वर्णिम अध्याय: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

स्वाधीनता आंदोलन में नाना साहेब पेशवा का संघर्ष इतिहास का स्वर्णिम अध्याय: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और कुशल नेतृत्वकर्ता पेशवा बालाजी बाजीराव ‘नाना साहेब’ की जयंती पर उन्हें नमन किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सोशल मीडिया ‘एक्स’ पर कहा कि नाना साहेब पेशवा शौर्य और साहस के पर्याय थे। वर्ष 1857 के पहले स्वाधीनता संग्राम में ब्रिटिश साम्राज्य के विरुद्ध उनका अदम्य साहस से ओतप्रोत संघर्ष भारतीय इतिहास का एक स्वर्णिम अध्याय है। नाना साहेब पेशवा ने मातृभूमि की रक्षा के लिए अगाध देशभक्ति, वीरता एवं संघर्ष का परिचय दिया था। उनके जीवनकाल से मिली प्रेरणा हर भारतवासी के हृदय में राष्ट्र सर्वोपरि की भावना का संचार करती है।

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मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव रविवार को सपत्नीक नर्मदापुरम जिले के पचमढ़ी प्रवास पर पहुंचे। पचमढ़ी से लौटते वक्त मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बारिआम गांव में सड़क किनारे टोकरी में रखकर आम बेच रहीं महिलाओं और बच्चों को देखकर अपना काफिला रूकवाया। मुख्यमंत्री ने आम बेच रहीं सभी महिलाओं से आत्मीय संवाद किया। पूछा – रोज कितने के आम बेच लेती हो ? मुख्यमंत्री को अपने बीच पाकर आम विक्रेता श्रीमती बसंती टेकाम की खुशी का ठिकाना न रहा, उसने प्रफुल्लित होकर बताया कि सर, रोज सुबह से शाम यहां बैठते हैं, तो 400 से 500 रूपए के आम बिक ही जाते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने समीप ही खड़ी श्रीमती बसंती की बेटी को देखकर पूछा – क्या ये बिटिया स्कूल जाती है ? महिला ने कहा कि हां सर, सीएम राइज स्कूल में पढ़ती है। मुख्यमंत्री ने हर्ष जताकर कहा कि अरे बिटिया, अब उसका नाम सांदीपनि विद्यालय हो गया है। मुख्यमंत्री ने यहां आम बेच रहीं सभी महिलाओं से आम खरीदे और खुद भुगतान भी किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव और उनकी धर्मपत्नी श्रीमती सीमा यादव ने महिलाओं से खरीदे हुए आम वहां एकत्रित सभी नन्हे-मुन्ने बच्चों में स्नेहपूर्वक वितरित कर दिए। मुख्यमंत्री ने इन बच्चों से भी बाल सुलभ संवाद किया और पूछा क्या नाम है, स्कूल जाते हो ? तो बच्चों में से उमेश, साक्षी और रिया ने कहा जी सर। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इन सभी बच्चों को रोज स्कूल जाने और मन लगाकर पढ़ाई करने की मनुहार की।

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