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आदतों में छोटे-छोटे बदलाव कर स्वच्छता के सहभागी बनें : कलेक्टर

आदतों में छोटे-छोटे बदलाव कर स्वच्छता के सहभागी बनें : कलेक्टर
स्वच्छता समग्र क्षमतावर्धन कार्यशाला का हुआ आयोजन
चार जिलों के सीएमओ, उपयंत्री एवं स्वच्छता नोडल हुए शामिल
कल करेंगे एक्सपोजर विजिट, थ्री स्टार रेटिंग में शामिल होने पर छतरपुर निकाय करेगा प्रतिनिधित्व
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#स्वच्छ_सर्वेक्षण_2024 अंतर्गत स्वच्छता समग्र क्षमतावर्धन कार्यशाला का शुभारंभ कलेक्टर श्री संदीप जी.आर. के मुख्यातिथ्य में दीपप्रज्जवलन कर किया गया। कार्यशाला में छतरपुर शहर सहित संभाग के सभी निकायों की स्वच्छता रेटिंग को बढ़ाने के संबंध में प्रशिक्षण दिया गया। छतरपुर शहर को संभाग में स्वच्छता की थ्री स्टार रेटिंग मिलने पर चार जिलों की कार्यशाला आयोजित करने का मौका मिला है। जिसमें स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) 2.0 की आधारभूत जानकारी, स्वच्छ सर्वेक्षण 2023 में संभागीय प्रदर्शन और नगर परिषदों की रैंकिंग, निकायवार अंतर विश्लेषण, नाले नालियों में इंटरसेप्शन एण्ड डायवर्जन सहित सीवेज ट्रीटमेंट तकनीकि, अपशिष्ट संग्रहण प्रणाली को सुदृढ़ बनाना, मानव संसाधन प्रबंधन आदि बिन्दुओं में बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रस्तुतीकरण किया गया। इस अवसर पर नगर पालिका अध्यक्ष छतरपुर श्रीमती ज्योति चौरसिया, संयुक्त संचालक श्री राजेश श्रीवास्तव, पीओडूडा श्रीमती साजिदा कुरैशी, सीएमओ श्रीमती माधुरी शर्मा सहित टीकमगढ़, पन्ना, निवाड़ी जिले के पीओडूडा, सीएमओ, उपयंत्री, स्वच्छता नोडल और स्वच्छता ब्राण्ड एम्बेसडर उपस्थित रहे। दूसरे दिवस मे कार्यशाला के अंतर्गत अधिकारियों द्वारा शहर की एक्सपोजर विजिट की जाएगी। कलेक्टर श्री जी.आर. ने छतरपुर निकाय को मिनिस्ट्री ऑफ हाउसिंग एवं अर्बन अफेयर्स भारत सरकार द्वारा जारी नवीन गार्बेज फ्री सिटीज की रेटिंग में 3 स्टार प्राप्त होने पर निकाय की स्वच्छता टीम को बधाई दी।
• लोगों को स्वच्छता के प्रति प्रभावी रूप से करें जागरूक
• अंधेरे वाली जगह में लाइटिंग का स्वच्छता में अहम रोल
कलेक्टर ने कहा कि हमें छोटे-छोटे बदलाव कर लोगों की आदतों को बदलना है ताकि जनता को स्वच्छ माहौल मिल सके। उन्होंने कहा सीएमओ और सफाई की टीम का स्वच्छता में अहम योगदान होता है। कचरा कहां डालना है लोगों को पता होना चाहिए। इसके लिए प्रभावीरूप से नागरिकों को जागरूक किया जाए। शौचालयों एवं अन्य ऐसे स्थान जहां अंधेरा रहता है तो वहां लाइट लगाएं। जिससे लोग ऐसे स्थानों पर कचरा नहीं फेंके। लाइटिंग का स्वच्छता में अहम रोल है।
कलेक्टर ने कहा सही स्थानों पर डस्टबिन एवं लिटरविन लगाए जाएं। उन्होंने वार्ड के व्हाट्सएप ग्रुप में आमलोगों को जोड़े और डोर टू डोर कचरा संग्रहण वाहनों के ड्राइवर अपनी लाइव लोकेशन ग्रुप में डालें। जिससे लोगों को कचरा वाहन आने की सटीक जानकारी मिल सके। उन्होंने कहा जीरो वेस्ट एवं प्लाष्टिक फ्री की ओर शहर को ले जाएं। उन्होंने कहा ऐसी व्यवस्था करें जिससे छतरपुर निकाय की स्वच्छता मशीनों को अन्य निकाय भी किराए पर हफ्ते में एक दिन के लिए ले सके। जिससे समग्र क्षमतावर्धन से हम स्वच्छ सर्वेक्षण 2024 में टॉप पर पहुंच सकें। इस अवसर पर स्व सहायता समूहों द्वारा अनुपयोगी सामग्री से तैयार की गयी सामग्री के स्टॉल का कलेक्टर श्री जी.आर. द्वारा निरीक्षण करते हुए कार्य की सराहना की गई।
• चार जिलों के 34 निकाय देखेंगे शहर का स्वच्छता मॉडल
कलेक्टर श्री संदीप जी.आर. के निर्देशन में 2023 में स्वच्छता के क्षेत्र में हुए कार्यों में छतरपुर निकाय को संभाग में नवीन गार्बेज फ्री सिटीज की रेटिंग में 3 स्टार प्राप्त हुई। जिससे यहां किए गए स्वच्छता कार्य, विशेष एक्टिविटी एवं स्वच्छता मॉडल को छतरपुर जिले सहित टीकमगढ़, निवाड़ी, पन्ना के 34 निकायों के सीएमओ, उपयंत्री, स्वच्छता नोडल को शहर का एक्सपोजर विजिट कराया जाएगा। जिसमें आवीसीय क्षेत्र में भ्रमण, डोर टू डोर संग्रहण, पृथक्करण और सफाई, जलीयसंरचना बड़ातालाब क्षेत्र का अवलोकन, आत्मनिर्भर वार्ड का भ्रमण, पार्क, एमआरएफ, कंपोस्टिंग, फिलस्लजट्रीटमेंट एवं निर्माण एवं विध्वंस इकाईयों का भ्रमण कराया जाएगा।

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मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि युवा शक्ति को मार्गदर्शन देने के लिए प्रदेश के युवाओं का कुंभ कराया जाए। इसे ज्ञान महाकुंभ नाम दिया जाए। उन्होंने कहा कि वर्ष में कम से कम एक बार महाविद्यालयों में बड़े वैज्ञानिकों को आमंत्रित किया जाए और विद्यार्थियों के साथ उनका जीवंत संवाद एवं समूह चर्चा आयोजित की जाए। इससे युवाओं के विज्ञान और तकनीक संबंधी ज्ञान में वृद्धि होगी। युवाओं में सामान्य ज्ञान बढ़ाने के लिए प्रदेश के हर संभाग में सामान्य ज्ञान की प्रतियोगिता कराएं। इससे हमारे युवा देश-दुनिया में हो रहे नवाचारों और नई जानकारियों से अवगत होते रहेंगे। उन्होंने कहा कि प्रदेश के सभी महाविद्यालयों की स्टेट लेवल पर ग्रेडिंग कराई जाए और तीन श्रेणियों में क्रमश: सर्वश्रेष्ठ महाविद्यालय, सर्वश्रेष्ठ प्राचार्य एवं सर्वश्रेष्ठ शिक्षक के रूप में पुरस्कृत करने की परम्परा भी प्रारंभ करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरूवार को मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन में उच्च शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। रोजगारपरक शिक्षा और शोध कार्यों को दें प्रोत्साहन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विभागीय अधिकारियों को भारतीय ज्ञान परम्पराओं पर आधारित रोजगारपरक शिक्षा दिए जाने पर जोर देते हुए कहा कि महाविद्यालयों में शोध केंद्र स्थापित कर शोध कार्यों को भी प्रोत्साहन दिया जाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश के सभी ऐसे क्षेत्रों में, जहां नए महाविद्यालय खोलने की अत्यंत आवश्यकता है, विशेषकर जनजातीय क्षेत्रों में, अधिकाधिक महाविद्यालय खोले जाएं। इससे जनजातीय वर्ग के विद्यार्थियों को निकट स्थान पर उच्च शिक्षा पाने का अवसर मिलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि उच्च शिक्षा के संदर्भ में वर्ष 2021-22 में हुए अखिल भारतीय सर्वेक्षण में मध्यप्रदेश का सकल नामांकन अनुपात (जीईआर) अखिल भारतीय औसत से अधिक आया है। इस क्षेत्र में अखिल भारतीय सकल नामांकन अनुपात 28.4 प्रतिशत है, जबकि मध्यप्रदेश 28.9 प्रतिशत आया है। उन्होंने कहा कि यह हमारे प्रयासों का परिणाम है। अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश के 55 जिलों के 1282 गोद लिए गए गाँवों में शिविर लगाकर विद्यार्थियों को जनजागरूकता गतिविधियों से जोड़ा गया है। प्रदेश में 384 शोध केंद्र संचालित हैं और जारी वित्त वर्ष में 100 नए शोध केंद्रों की स्थापना का लक्ष्य तय किया गया है। प्रदेश के 27 महाविद्यालयों को स्वशासी महाविद्यालय का दर्जा एवं 8 स्वशासी महाविद्यालयों को डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा देने का प्रस्ताव है। साथ ही 23 जिला मुख्यालयों में नए विधि महाविद्यालयों की स्थापना का लक्ष्य भी तय किया गया है। अधिकाधिक महाविद्यालयों में संचालित करें बीएससी एग्रीकल्चर पाठ्यक्रम मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश के अधिकाधिक महाविद्यालयों में बीएससी एग्रीकल्चर पाठ्यक्रम संचालित किए जाएं। इससे विद्यार्थियों की कृषि एवं कृषि आधारित प्र-संस्करण उद्योगों में रूचि बढ़ेगी। इस तरह का नवाचार करने के मामले में मध्यप्रदेश को मॉडल स्टेट बनाने का प्रयास करें। उन्होंने कहा कि इसके लिए अब तक चयनित हुए सभी महाविद्यालयों में इसी सत्र से बीएससी (कृषि) पाठ्यक्रम की पढ़ाई प्रारंभ करें। प्रदेश के सभी 55 जिलों प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस संचालित हैं, इनमें से 37 प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस महाविद्यालयों एवं 5 विश्वविद्यालयों में 7 प्रकार के रोजगार आधारित डिग्री एवं डिप्लोमा पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। इन पाठ्यक्रमों में करीब 1200 विद्यार्थी शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। दो शिफ्ट में कॉलेज लगाने के निर्देश, सेमेस्टर सिस्टम भी जारी रहे मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विभागीय अधिकारियों को महाविद्यालयों में दो शिफ्ट में अध्यापन कार्य संचालित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सेमेस्टर सिस्टम भी आवश्यकतानुसार जारी रहे। इससे विद्यार्थियों को बिना किसी बाधा के शिक्षा पूरी करने में आसानी होगी। उच्च शिक्षा मंत्री ने बताया कि हम विद्यार्थियों की दैनिक उपस्थिति को उनके क्रेडिट स्कोर से जोड़ रहे हैं, इससे विद्यार्थियों की उपस्थिति बढ़ रही है। शासकीय विश्वविद्यालयों में म.प्र. लोक सेवा आयोग से ही कराएं प्राध्यापकों की भर्ती मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पीएमश्री उत्कृष्टता महाविद्यालयों में अब तक की प्रगति और विकास की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि प्रदेश के सभी शासकीय विश्वविद्यालयों में प्राध्यापकों की भर्ती म.प्र. लोक सेवा आयोग के माध्यम से ही की जाए। राष्ट्रीय शिक्षा नीति – 2020 के अंतर्गत सेमेस्टर के माध्यम से परीक्षाओं के आयोजन की तैयारी करें। राष्ट्रीय शिक्षा नीति की टास्क फोर्स/शीर्ष समिति की बैठक में दिए गए निर्देशों का अक्षरश: पालन करें। विश्व बैंक प्रोजेक्ट में महाविद्यालय में कंप्यूटर लैब और अन्य सभी जरूरी विकास कार्य कराए जाएं। विकसित मध्यप्रदेश@2047 बैठक में उच्च शिक्षा, आयुष एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री श्री इंदर सिंह परमार ने बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के मार्गदर्शन में हम विकसित मध्यप्रदेश@2047 के तहत विद्यार्थियों को विश्वस्तरीय उच्च शिक्षा उपलब्ध कराने की ओर अग्रसर हैं। राज्य सरकार द्वारा युवाओं में उद्यमशीलता बढ़ाने के लिए नए पाठ्यक्रम संचालित करने का लक्ष्य तय किया गया है। इसी लक्ष्य की पूर्ति के लिए उच्च शिक्षा विभाग ने साम्यता एवं पहुंच, शोध एवं नवाचार, उन्नत तकनीकों का प्रभावी उपयोग कर विद्यार्थियों, महाविद्यालयों, संस्थाओं एवं शिक्षण प्रणाली के सुदृढ़ीकरण के मानक बिंदु तय कर लिए हैं। हम तय लक्ष्यों को पूरा करने के लिए तेजी से अग्रसर हैं। बैठक में मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव (मुख्यमंत्री कार्यालय) डॉ. राजेश राजौरा, अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा विभाग श्री अनुपम राजन, आयुक्त उच्च शिक्षा श्री निशांत वरवड़े सहित अन्य सभी विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

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