डब्ल्यू आर आई इंडिया एवं ईपीसीओ के संयुक्त तत्वाधान में खाद्य हानि और भोजन की बर्बादी को लेकर कार्यशाला आयोजित
ग्वालियर मध्य प्रदेश का चौथा सबसे बड़ा शहर है और इसने सतत वेस्ट प्रबंधन पारिस्थितिकी तंत्र बनाने, स्वास्थ्य और स्वच्छता के बेहतर मानकों को सुनिश्चित करने और जीवन की गुणवत्ता बनाए रखने के प्रयासों के तहत कई कदम उठाए हैं। स्वच्छ सर्वेक्षण 2023 में ग्वालियर 37 पायदान ऊपर चढ़कर भारतीय शहरों (1 लाख से अधिक जनसंख्या वाले शहर) की रैंकिंग में 16वें स्थान पर पहुंच गया हैं। इसके साथ ही ग्वालियर, इंदौर और भोपाल के बाद मध्य प्रदेश का तीसरा सबसे साफ शहर बन गया। स्वच्छ सर्वेक्षण 2023 के अंतर्गत ग्वालियर को कचरा मुक्त शहरी (जी.एफ.सी.) प्रमाणीकरण 3 स्टार रेटिंग दी गई और यह स्वच्छ सर्वेक्षण 2024 में 5 स्टार रेटिंग प्राप्त करने की दिशा में कार्य कर रहा है।
वेस्ट टू वेल्थ की अपनी परिकल्पना को साकार करने के लिए हमने बायो सीएनजी प्लांट के साथ भारत की पहली आधुनिक और आत्मनिर्भर गौशाला शुरू की है। यह प्लांट 100 टन गोबर का उपयोग करके प्रतिदिन 3 टन सीएनजी और 20 टन उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद का उत्पादन कर रहा है।स्वच्छ भारत मिशन 2.0 के तहत कचरा मुक्त शहर की हमारी परिकल्पना पर कार्य को आगे बढ़ाने के लिए हम स्वीकृत परियोजनाएं 350 टीपीडी बायो सीएनजी प्लांट 277 टीपीडी एम.आर.एफ., 3 लाख टीपीडी क्षमता की रीजनल सेनेटरी लैंडफिल एवं 100 टीपीडी सी.एंड.डी. प्लांट के निर्माण की योजना बना रहे हैं। इसके अतिरिक्त दो नवीन परियोजनाएं वेस्ट टू एनर्जी एवं तीन ट्रांसफर स्टेशनों का निर्माण प्रस्तावित है।
हम ग्वालियर के नागरिकों से भी आग्रह करते हैं कि वे स्रोत पर ही अपशिष्ट का पृथक्करण करने तथा पॉलिथीन का उपयोग बंद करने में नगर निगम का सहयोग करें। ग्वालियर को ‘‘ईट राइट चैलेंज’’ प्रतियोगिता में खाद्य पर्यावरण में सुधार लाने तथा जनसमुदायों को खाद्य सुरक्षा के बारे में शिक्षित करने की रणनीति लागू करने के प्रयासों के मामले में राष्ट्रीय स्तर पर पांचवां स्थान दिया गया है।
हमारे लिए यह कार्यशाला वेस्ट प्रबंधन के अंतर्गत फूड वेस्ट में कमी लाने पर विशेष रूप से ध्यान केंद्रित करने और इस पर चर्चा करने का एक अच्छा अवसर है। मेरा मानना है कि एक बढ़ते हुए जिले के रूप में ग्वालियर के लिए खाद्य हानि और भोजन की बर्बादी को कम करने के लिए सतत प्रथाओं के साथ तालमेल बैठाना महत्वपूर्ण है। साथ ही यह सुनिश्चित करना भी महत्वपूर्ण है कि संसाधनों का कुशलतापूर्वक उपयोग किया जाए।
विभिन्न विभागों, उद्योगों और क्षेत्रों के हितधारकों के साथ इस सहभागिता से हमें प्रमुख चुनौतियों की पहचान करने, अच्छे तरीकों पर चर्चा करने और शहर में खाद्य हानि और भोजन की बर्बादी को कम करने के लिए तरीकों को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। इसके अलावा, व्यवहार में बदलाव और नागरिकों की सहभागिता से इस लक्ष्य की दिशा में दीर्घकालिक सकारात्मक परिणाम प्राप्त करने में मदद मिलेगी और स्वच्छ तथा हरे-भरे ग्वालियर की हमारी परिकल्पना को मूर्त रूप देने में योगदान होगा। विविध हितधारकों की भागीदारी को सम्भव बनाना और विशेष रूप से रेजीडेंट्स एसोसिएशंस, रेस्टोरेंट्स और कैटरर्स जैसे थोक खाद्य उत्पादकों और गैर सरकारी संगठनों को शामिल कर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करना।
