चिकित्सा शिक्षा एवं स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार में मध्यप्रदेश देश में अग्रणी : केन्द्रीय मंत्री श्री नड्डा एचआईवी/एड्स की जंग को जीतने में समाज के...
नायक्करपट्टी टंगस्टन ब्लॉक में पर्यावरण सुरक्षा मानकों का पालन होगा खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 में खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन...
सीमेंट, कंक्रीट और निर्माण सामग्री पर 18वें एनसीबी अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन और प्रदर्शनी के दौरान भारतीय सीमेंट उद्योग के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान किए गए सीमेंट,...
‘विकसित भारत 2047 – विज़न ऑफ न्यू इंडिया 3.0’ कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति के संबोधन का मूल पाठ (अंश विकसित भारत अब सपना नहीं है, विकसित भारत लक्ष्य है, और चुनौतीपूर्ण लक्ष्य है। और यह लक्ष्य हम हासिल करके रहेंगे, यह हमारा संकल्प है। आखिर यह सब संभव कैसे हुआ? एक बहुत बड़ी सोच थी, और सबसे पहले सोच यह थी कि गरीब की दस्तक बैंकिंग व्यवस्था में होनी चाहिए। अकल्पनीय सोच! कम से कम समय में 50 करोड़ लोग बैंकिंग व्यवस्था से जुड़ गए। यह कोई छोटी बात नहीं है, और इसी का नतीजा है कि हमारी व्यवस्था में पारदर्शिता आई है, उत्तरदायित्व आया है। उस जमाने को हम याद करते हैं, एक युवा प्रधानमंत्री की पीड़ा थी—”1 रुपया भेजता हूं, 10 पैसे पहुंचता हैं।” अब 1 रुपया , 1 रुपया पहुंचता है। बिना बिचौलिए के पहुंचता है, बिना मिडिलमैन के पहुंचता है, बिना किसी कट के पहुंचता है, और सीधा उसके अकाउंट में जाता है। कभी सोचा था? एक साल में चार एयरपोर्ट नए बन रहे हैं। मेट्रो सिस्टम बन रहा है और साल को छोड़ दो, प्रतिदिन पर आ जाइए—14 किलोमीटर राजमार्ग और 6 किलोमीटर रेलवे लाइन, कितनी ऊर्जा देखिए! पहले सोचते थे कि गांव में बिजली आ गई क्या? चाहे एक घर हो, प्रधानमंत्री ने सोच बदला, सब गांव में बिजली जाएगी और सब घर जाएगी । पहले International Monetary Fund,...
सांची में महाबोधि महोत्सव 30 नवम्बर से, म.प्र. टूरिज्म बोर्ड बौद्ध सर्किट करेगा प्रचारित यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल सांची में 30 नवम्बर से 01 दिसम्बर,...