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खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री विश्वास कैलाश सारंग ने भोपाल वासियों से 19 जनवरी को आयोजित होने वाली ऑर्मी मैराथन में बड़ी संख्या में भाग लेने का आह्वान किया है।

खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री विश्वास कैलाश सारंग ने भोपालवासियों से 19 जनवरी को आयोजित होने वाली ऑर्मी मैराथन में बड़ी संख्या में भाग लेने का आह्वान किया है। इस मैराथन का उद्देश्य फिटनेस, एकता और देशभक्ति को प्रोत्साहित करना है। “फिट इंडिया, रन विद इंडियन ऑर्मी” के आदर्श वाक्य के साथ यह आयोजन हर उम्र और वर्ग के लोगों को शारीरिक स्वास्थ्य और देशप्रेम के प्रति प्रेरित करेगा। मंत्री श्री सारंग ने विशेष रूप से युवाओं और परिवारों को इस आयोजन में बढ़-चढ़कर शामिल होने का आग्रह किया है।

मैराथन में तीन श्रेणियाँ रखी गई हैं, जिसमें 21 किलोमीटर (हॉफ मैराथन), 10 किलोमीटर, और 5 किलोमीटर की दौड़ शामिल है। इन श्रेणियों के लिए क्रमशः 600, 500 और 400 रुपये का रजिस्ट्रेशन शुल्क निर्धारित किया गया है। प्रतिभागियों को टी-शर्ट और भागीदारी प्रमाण-पत्र प्रदान किए जाएंगे। रजिस्ट्रेशन के लिए http://www.armymarathonbhopal.com पर आवेदन किया जा सकता है, और अधिक जानकारी के लिए 62690-33347 पर संपर्क किया जा सकता है।

यह मैराथन भोपाल के द्रौणांचल से शुरू होकर वीआईपी रोड होते हुए द्रौणांचल पर ही समाप्त होगी। सुबह 6 बजे प्रारंभ होने वाले इस आयोजन में लगभग 12 हज़ार प्रतिभागी शामिल होंगे। आयोजन के दौरान 10 लाख रुपये तक के आकर्षक नकद पुरस्कार भी दिए जाएंगे। हॉफ मैराथन में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागी को 1 लाख, द्वितीय स्थान को 50 हज़ार और तृतीय स्थान को 25 हज़ार रुपये प्रदान किये जायेंगे। इसी प्रकार 10 किलोमीटर की दौड़ में 50 हज़ार, 25 हज़ार और 15 हज़ार रुपये के पुरस्कार दिए जाएंगे। 5 किलोमीटर दौड़ के लिए 20 हज़ार, 15 हज़ार और 10 हज़ार रुपये के नकद पुरस्कार निर्धारित हैं।

यह आयोजन भारतीय सेना दिवस के उपलक्ष्य में भारतीय सेना के सुदर्शन चक्र कोर द्वारा आयोजित किया जा रहा है। सेना दिवस 15 जनवरी को मनाया जाता है, जो 1949 में जनरल केएम करियप्पा के भारतीय सेना के पहले कमांडर इन चीफ के रूप में कार्यभार ग्रहण करने की याद में मनाया जाता है। इस ऐतिहासिक अवसर पर ऑर्मी मैराथन का उद्देश्य सेना और आमजन के बीच जुड़ाव को बढ़ावा देना और इसे भोपाल में वार्षिक खेल आयोजन के रूप में स्थापित करना है।

इस कार्यक्रम के माध्यम से फिट इंडिया अभियान को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ यह आयोजन स्थानीय समुदायों, खेल प्रेमियों और सशस्त्र बलों के सदस्यों को एकजुट करने का प्रयास है। भोपाल में आर्मी मैराथन मुख्यालय पश्चिम एमपी सब एरिया के तत्वाधान में आयोजित होने वाला यह पहला खेल आयोजन है। इसका उद्देश्य आर्मी मैराथन को खेल जगत में प्रमुख आयोजन बनाना और फिट इंडिया अभियान के साथ वार्षिक मैराथन कैलेंडर में दर्ज करना है।

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मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि युवा शक्ति को मार्गदर्शन देने के लिए प्रदेश के युवाओं का कुंभ कराया जाए। इसे ज्ञान महाकुंभ नाम दिया जाए। उन्होंने कहा कि वर्ष में कम से कम एक बार महाविद्यालयों में बड़े वैज्ञानिकों को आमंत्रित किया जाए और विद्यार्थियों के साथ उनका जीवंत संवाद एवं समूह चर्चा आयोजित की जाए। इससे युवाओं के विज्ञान और तकनीक संबंधी ज्ञान में वृद्धि होगी। युवाओं में सामान्य ज्ञान बढ़ाने के लिए प्रदेश के हर संभाग में सामान्य ज्ञान की प्रतियोगिता कराएं। इससे हमारे युवा देश-दुनिया में हो रहे नवाचारों और नई जानकारियों से अवगत होते रहेंगे। उन्होंने कहा कि प्रदेश के सभी महाविद्यालयों की स्टेट लेवल पर ग्रेडिंग कराई जाए और तीन श्रेणियों में क्रमश: सर्वश्रेष्ठ महाविद्यालय, सर्वश्रेष्ठ प्राचार्य एवं सर्वश्रेष्ठ शिक्षक के रूप में पुरस्कृत करने की परम्परा भी प्रारंभ करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरूवार को मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन में उच्च शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। रोजगारपरक शिक्षा और शोध कार्यों को दें प्रोत्साहन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विभागीय अधिकारियों को भारतीय ज्ञान परम्पराओं पर आधारित रोजगारपरक शिक्षा दिए जाने पर जोर देते हुए कहा कि महाविद्यालयों में शोध केंद्र स्थापित कर शोध कार्यों को भी प्रोत्साहन दिया जाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश के सभी ऐसे क्षेत्रों में, जहां नए महाविद्यालय खोलने की अत्यंत आवश्यकता है, विशेषकर जनजातीय क्षेत्रों में, अधिकाधिक महाविद्यालय खोले जाएं। इससे जनजातीय वर्ग के विद्यार्थियों को निकट स्थान पर उच्च शिक्षा पाने का अवसर मिलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि उच्च शिक्षा के संदर्भ में वर्ष 2021-22 में हुए अखिल भारतीय सर्वेक्षण में मध्यप्रदेश का सकल नामांकन अनुपात (जीईआर) अखिल भारतीय औसत से अधिक आया है। इस क्षेत्र में अखिल भारतीय सकल नामांकन अनुपात 28.4 प्रतिशत है, जबकि मध्यप्रदेश 28.9 प्रतिशत आया है। उन्होंने कहा कि यह हमारे प्रयासों का परिणाम है। अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश के 55 जिलों के 1282 गोद लिए गए गाँवों में शिविर लगाकर विद्यार्थियों को जनजागरूकता गतिविधियों से जोड़ा गया है। प्रदेश में 384 शोध केंद्र संचालित हैं और जारी वित्त वर्ष में 100 नए शोध केंद्रों की स्थापना का लक्ष्य तय किया गया है। प्रदेश के 27 महाविद्यालयों को स्वशासी महाविद्यालय का दर्जा एवं 8 स्वशासी महाविद्यालयों को डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा देने का प्रस्ताव है। साथ ही 23 जिला मुख्यालयों में नए विधि महाविद्यालयों की स्थापना का लक्ष्य भी तय किया गया है। अधिकाधिक महाविद्यालयों में संचालित करें बीएससी एग्रीकल्चर पाठ्यक्रम मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश के अधिकाधिक महाविद्यालयों में बीएससी एग्रीकल्चर पाठ्यक्रम संचालित किए जाएं। इससे विद्यार्थियों की कृषि एवं कृषि आधारित प्र-संस्करण उद्योगों में रूचि बढ़ेगी। इस तरह का नवाचार करने के मामले में मध्यप्रदेश को मॉडल स्टेट बनाने का प्रयास करें। उन्होंने कहा कि इसके लिए अब तक चयनित हुए सभी महाविद्यालयों में इसी सत्र से बीएससी (कृषि) पाठ्यक्रम की पढ़ाई प्रारंभ करें। प्रदेश के सभी 55 जिलों प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस संचालित हैं, इनमें से 37 प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस महाविद्यालयों एवं 5 विश्वविद्यालयों में 7 प्रकार के रोजगार आधारित डिग्री एवं डिप्लोमा पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। इन पाठ्यक्रमों में करीब 1200 विद्यार्थी शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। दो शिफ्ट में कॉलेज लगाने के निर्देश, सेमेस्टर सिस्टम भी जारी रहे मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विभागीय अधिकारियों को महाविद्यालयों में दो शिफ्ट में अध्यापन कार्य संचालित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सेमेस्टर सिस्टम भी आवश्यकतानुसार जारी रहे। इससे विद्यार्थियों को बिना किसी बाधा के शिक्षा पूरी करने में आसानी होगी। उच्च शिक्षा मंत्री ने बताया कि हम विद्यार्थियों की दैनिक उपस्थिति को उनके क्रेडिट स्कोर से जोड़ रहे हैं, इससे विद्यार्थियों की उपस्थिति बढ़ रही है। शासकीय विश्वविद्यालयों में म.प्र. लोक सेवा आयोग से ही कराएं प्राध्यापकों की भर्ती मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पीएमश्री उत्कृष्टता महाविद्यालयों में अब तक की प्रगति और विकास की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि प्रदेश के सभी शासकीय विश्वविद्यालयों में प्राध्यापकों की भर्ती म.प्र. लोक सेवा आयोग के माध्यम से ही की जाए। राष्ट्रीय शिक्षा नीति – 2020 के अंतर्गत सेमेस्टर के माध्यम से परीक्षाओं के आयोजन की तैयारी करें। राष्ट्रीय शिक्षा नीति की टास्क फोर्स/शीर्ष समिति की बैठक में दिए गए निर्देशों का अक्षरश: पालन करें। विश्व बैंक प्रोजेक्ट में महाविद्यालय में कंप्यूटर लैब और अन्य सभी जरूरी विकास कार्य कराए जाएं। विकसित मध्यप्रदेश@2047 बैठक में उच्च शिक्षा, आयुष एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री श्री इंदर सिंह परमार ने बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के मार्गदर्शन में हम विकसित मध्यप्रदेश@2047 के तहत विद्यार्थियों को विश्वस्तरीय उच्च शिक्षा उपलब्ध कराने की ओर अग्रसर हैं। राज्य सरकार द्वारा युवाओं में उद्यमशीलता बढ़ाने के लिए नए पाठ्यक्रम संचालित करने का लक्ष्य तय किया गया है। इसी लक्ष्य की पूर्ति के लिए उच्च शिक्षा विभाग ने साम्यता एवं पहुंच, शोध एवं नवाचार, उन्नत तकनीकों का प्रभावी उपयोग कर विद्यार्थियों, महाविद्यालयों, संस्थाओं एवं शिक्षण प्रणाली के सुदृढ़ीकरण के मानक बिंदु तय कर लिए हैं। हम तय लक्ष्यों को पूरा करने के लिए तेजी से अग्रसर हैं। बैठक में मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव (मुख्यमंत्री कार्यालय) डॉ. राजेश राजौरा, अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा विभाग श्री अनुपम राजन, आयुक्त उच्च शिक्षा श्री निशांत वरवड़े सहित अन्य सभी विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

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