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राष्ट्रीय जल पुरस्कार 2024 में मध्यप्रदेश का जल संरक्षण मॉडल फिर चमका खरगोन को पूर्वी क्षेत्र का सर्वश्रेष्ठ जिला, कावेश्वर ग्राम पंचायत को द्वितीय स्थान “जल संचय-जन भागीदारी” पहल में भी ईस्ट निमाड़ और गुना को शीर्ष रैंक

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📰 राष्ट्रीय जल पुरस्कार 2024 में मध्यप्रदेश का जल संरक्षण मॉडल फिर चमका
खरगोन को पूर्वी क्षेत्र का सर्वश्रेष्ठ जिला, कावेश्वर ग्राम पंचायत को द्वितीय स्थान
“जल संचय-जन भागीदारी” पहल में भी ईस्ट निमाड़ और गुना को शीर्ष रैंक

मध्यप्रदेश ने जल संरक्षण के क्षेत्र में एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान दर्ज की है। नई दिल्ली में आयोजित समारोह में जल शक्ति मंत्री श्री सी. आर. पाटिल ने 6वें राष्ट्रीय जल पुरस्कारों की घोषणा की। इस अवसर पर मध्यप्रदेश को दो प्रमुख श्रेणियों में सम्मान प्राप्त हुआ —

  • खरगोन जिला को पूर्वी क्षेत्र के सर्वश्रेष्ठ जिले का पुरस्कार मिला।

  • खंडवा जिले की ग्राम पंचायत कावेश्वर को सर्वश्रेष्ठ ग्राम पंचायत श्रेणी में संयुक्त रूप से द्वितीय स्थान प्राप्त हुआ।

इन पुरस्कारों का वितरण राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु द्वारा 18 नवम्बर 2025 को किया जाएगा।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इन उपलब्धियों पर जिलों को बधाई देते हुए कहा कि “यह सम्मान प्रदेश के जल योद्धाओं की मेहनत और जनभागीदारी की मिसाल है।”


💧 जल संचय-जन भागीदारी पहल में भी एमपी को बड़ी सफलता

जल शक्ति मंत्रालय की “कैच द रेन – जल संचय, जन भागीदारी” पहल में भी मध्यप्रदेश ने अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज की।

  • वेस्टर्न ज़ोन (श्रेणी-1) में ईस्ट निमाड़ को प्रथम स्थान मिला।

  • श्रेष्ठ 50 शहरी निकायों की सूची में गुना जिला पहले स्थान पर रहा।

  • श्रेणी-3 जिलों में गुना, बैतूल, धार, देवास, सिवनी और खरगोन को चयनित किया गया।


🌊 जल संरक्षण में जनभागीदारी का राष्ट्रीय मॉडल

जल शक्ति मंत्रालय के अंतर्गत जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण विभाग द्वारा घोषित इन पुरस्कारों में इस वर्ष कुल 46 विजेता (संयुक्त विजेताओं सहित) चुने गए हैं।
पुरस्कार 10 प्रमुख श्रेणियों में दिए जा रहे हैं —
सर्वश्रेष्ठ राज्य, जिला, ग्राम पंचायत, शहरी निकाय, स्कूल/कॉलेज, उद्योग, जल उपयोक्ता संघ, संस्था, सिविल सोसायटी और जल क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्ति।

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में यह पहल “जल समृद्ध भारत” के विजन को साकार कर रही है।
राष्ट्रीय जल पुरस्कारों की शुरुआत वर्ष 2018 में की गई थी, ताकि देशभर में जल प्रबंधन, संरक्षण और जनभागीदारी को प्रोत्साहित किया जा सके।


🏆 पुरस्कार प्रक्रिया और उद्देश्य

वर्ष 2024 के लिए राष्ट्रीय जल पुरस्कारों के आवेदन 23 अक्टूबर 2024 को खोले गए थे।
751 आवेदन प्राप्त हुए, जिनकी समीक्षा विशेषज्ञ समिति, केंद्रीय जल आयोग और केंद्रीय भूजल बोर्ड द्वारा की गई।
अंततः 46 विजेताओं का चयन किया गया।

इन पुरस्कारों का उद्देश्य —

  • जल संसाधन संरक्षण में व्यक्तियों और संस्थाओं के उत्कृष्ट प्रयासों की पहचान करना

  • देश में जल जागरूकता और सामूहिक जिम्मेदारी की भावना को सशक्त बनाना

  • जल संचयन और पुनर्भरण के वैज्ञानिक उपायों को जन-आंदोलन का रूप देना है।


💦 संरचनाओं से सतत विकास तक

इस पहल के तहत राज्यों को पाँच ज़ोन में बाँटा गया है। जिलों को कम से कम 10,000 कृत्रिम भू-जल पुनर्भरण संरचनाएँ बनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया है।
इनमें रूफटॉप रेनवॉटर हार्वेस्टिंग, तालाबों-बावड़ियों का पुनर्जीवन और झीलों की सफाई एवं संरक्षण शामिल है।
शहरी क्षेत्रों में भी 2,000 से अधिक जल संरचनाएँ विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है।


📸 मध्यप्रदेश का जल संरक्षण मॉडल “जनभागीदारी से जल समृद्धि” का प्रेरक उदाहरण बनकर उभरा है — जहां समाज, सरकार और संवेदना ने मिलकर सतत विकास की नई धारा प्रवाहित की है।

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