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वन्य-जीव पर्यटन बना विशेष आकर्षण का केन्द्र

वन्य-जीव पर्यटन में मध्यप्रदेश विशेष आकर्षण का केन्द्र बनकर उभरा है। टाइगर रिजर्व में देशी और विदेशी पर्यटकों की संख्या में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है। प्रदेश के टाइगर रिजर्व में वर्ष 2024-25 में बाँधवगढ़ टाइगर रिजर्व में 32 हजार 528, कान्हा टाइगर रिजर्व में 23 हजार 59, पन्ना टाइगर रिजर्व में 15 हजार 201, पेंच टाइगर रिजर्व में 13 हजार 127 और सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में 10 हजार 38 विदेशी पर्यटक आये। जबकि गत वर्ष 2023-24 में बाँधवगढ़ टाइगर रिजर्व में विदेशी पर्यटकों की संख्या 25 हजार 894, कान्हा टाइगर रिजर्व में 18 हजार 179, पन्ना टाइगर रिजर्व में 12 हजार 538, पेंच टाइगर रिजर्व में 9 हजार 856 और सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में 6 हजार 876 थी।

बाँधवगढ़ टाइगर रिजर्व बना पर्यटकों की पहली पसंद

बाँधवगढ़ टाइगर रिजर्व पर्यटकों की पहली पसंद बन रहा है। टाइगर रिजर्व में पर्यटकों की संख्या में प्रतिवर्ष वृद्धि हो रही है। वर्ष 2020-21 में भारतीय पर्यटकों की संख्या एक लाख 20 हजार 800, वर्ष 2021-22 में एक लाख 69 हजार 738, वर्ष 2022-23 में एक लाख 64 हजार 559, वर्ष 2023-24 में एक लाख 23 हजार 32 और वर्ष 2024-25 में माह मई तक एक लाख 60 हजार 500 रही। साथ ही विदेशी पर्यटकों की संख्या में भी बढ़ोत्तरी हो रही है। वर्ष 2020-21 में 109 (कोविड काल), वर्ष 2021-22 में 5 हजार 945, वर्ष 2022-23 में 21 हजार 266, वर्ष 2023-24 में 25 हजार 894 और वर्ष 2024-25 में माह मई तक 32 हजार 528 विदेशी पर्यटक आये। यानि कुल 5 वर्ष में भारतीय पर्यटकों की संख्या 7 लाख 38 हजार 637 और विदेशी पर्यटकों की संख्या 85 हजार 742 रही। इस प्रकार कुल 8 लाख 24 हजार 379 पर्यटकों की संख्या रही। इन पर्यटकों से वर्ष 2020-21 में लगभग 4 करोड़ 65 लाख, वर्ष 2021-22 में 11 करोड़ 88 लाख, वर्ष 2022-23 में 13 करोड़ 90 लाख, वर्ष 2023-24 में 14 करोड़ 10 लाख और वर्ष 2024-25 में मई माह तक 16 करोड़ 67 लाख, इस प्रकार कुल 5 वर्षों में टाइगर रिजर्व की लगभग 61 करोड़ 22 लाख की आय प्राप्त हुई।

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“शक्ति दीदी” के रूप में पेट्रोल पंपों पर फ्यूल डिलेवरी वर्कर का काम कर रहीं महिलाएँ आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर तो बनी ही हैं, उनका आत्म बल व आत्म सम्मान भी बढ़ गया है। यह कहना है काल्पीब्रिज के समीप स्थित गणेश पेट्रोल पंप पर काम कर रहीं शक्ति दीदी श्रीमती लता राजौरिया का। लता जैसी जिले की 35 जरूरतमंद महिलायें शक्ति दीदी के रूप में ग्वालियर शहर, डबरा व भितरवार स्थित पेट्रोल पंपों पर सफलतापूर्वक फ्यूल डिलेवरी वर्कर की जिम्मेदारी निभा रही हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशा के अनुरूप ग्वालियर जिले में जरूरतमंद महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से कलेक्टर श्रीमती रुचिका चौहान ने “शक्ति दीदी” योजना शुरू की है। जिसके तहत ऐसी महिलाओं को शक्ति दीदी बनाकर पेट्रोल पंपों पर फ्यूल डिलेवरी वर्कर की जिम्मेदारी दिलाई जा रही है जो जरूरतमंद हैं, अपनों द्वारा उपेक्षित हैं अथवा जिनके पति का असमय निधन हो चुका है। शक्ति दीदी के रूप में पेट्रोल पंप पर काम कर रहीं महिलायें कहती हैं कि अब हमें छोटी-मोटी जरूरतों के लिये किसी के आगे हाथ नहीं फैलाने पड़ते। हमें सरकार की लाड़ली बहना योजना व नि:शुल्क राशन वितरण कार्यक्रम का लाभ भी मिल रहा है। इससे हमारे परिवार के दिन अब अच्छे से गुजर रहे हैं। महिलाओं को फ्यूल डिलेवरी वर्कर के रूप में काम करने में कोई कठिनाई न हो, इसके लिये जिला प्रशासन द्वारा प्रात: 9 बजे से सायंकाल 5 बजे तक का इनका ड्यूटी टाइम निर्धारित कराया गया है। जिन पेट्रोल पंपों पर शक्ति दीदी काम कर रही हैं उन पर पुलिस द्वारा लगातार गश्त किया जाता है। साथ ही एक वॉट्सएप ग्रुप भी तैयार कराया गया है, जिस पर शक्ति दीदियों के साथ-साथ संबंधित पुलिस थाना, वरिष्ठ प्रशासनिक व पुलिस अधिकारी एवं पेट्रोल पंपों के संचालकों के नाम जुड़े हैं। खाद्य विभाग के अधिकारी भी शक्ति दीदियों का हालचाल जानने नियमित रूप से पेट्रोल पंपों पर पहुँचते हैं। जिन पेट्रोल पंपों पर शक्ति दीदी काम कर रही हैं, वहाँ सकारात्मक माहौल बना है। पेट्रोल पंप संचालक कहते हैं कि छोटी-मोटी बातों को लेकर उपभोक्ताओं के साथ आए दिन होने वाला मुँहवाद अब नहीं होता। शक्ति दीदियों को मासिक मानदेय के रूप में 8 हजार रूपए मिलते हैं। साथ ही कुछ पेट्रोल पंप संचालकों द्वारा तेल की बिक्री पर अतिरिक्त बोनस भी दिया जा रहा है। इससे सभी शक्ति दीदी मन लगाकर काम करती हैं। लता व कुसुमा कहती हैं कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार ने हम सब लोगों को आर्थिक व मानसिक रूप से सशक्त बना दिया है।

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