ई-टोकन व्यवस्था से किसानों को समय पर मिलेगा उर्वरक, लंबी कतारों से मिलेगी राहत
छतरपुर।
किसानों को उर्वरक की समय पर, पारदर्शी और व्यवस्थित आपूर्ति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश सरकार द्वारा ई-विकास प्रणाली के अंतर्गत ई-टोकन व्यवस्था लागू की जा रही है। उप संचालक कृषि ने बताया कि यह प्रणाली उर्वरक वितरण में फैली अव्यवस्थाओं जैसे लंबी कतारें, कालाबाजारी, अनियमित वितरण और बिचौलियों की भूमिका को समाप्त करने के लिए एक महत्वपूर्ण डिजिटल पहल है।
ई-टोकन प्रणाली के अंतर्गत किसान के पंजीयन के बाद उर्वरक प्राप्ति हेतु एक डिजिटल टोकन जारी किया जाएगा, जिसमें किसान का नाम, पंजीयन क्रमांक, उर्वरक का प्रकार और मात्रा, वितरण केंद्र, निर्धारित तिथि एवं समय अंकित रहेगा। यह टोकन किसान को एसएमएस, मोबाइल एप या वेब पोर्टल के माध्यम से प्राप्त होगा, जिसके अनुसार वह तय समय पर उर्वरक ले सकेगा।
पारदर्शी और आधुनिक व्यवस्था
इस प्रणाली के माध्यम से हर उर्वरक वितरण का डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा, जिससे सरकारी निगरानी और नियंत्रण मजबूत होगा। किसानों को घंटों लाइन में खड़े रहने से राहत मिलेगी और कालाबाजारी पर प्रभावी अंकुश लगेगा। साथ ही सरकार को रीयल-टाइम डेटा के माध्यम से उर्वरक की मांग और आपूर्ति पर बेहतर नियंत्रण प्राप्त होगा।
ई-टोकन प्राप्त करने की प्रक्रिया
किसान अपने मोबाइल से गूगल पर ई-विकास प्रणाली सर्च कर या उपलब्ध लिंक के माध्यम से पोर्टल पर जाकर आधार नंबर और ओटीपी से लॉगिन कर सकते हैं। इसके बाद एग्रीस्टैक (फार्मर आईडी) के माध्यम से भूमि विवरण अपडेट कर मौसम और फसल का चयन किया जाएगा। पोर्टल पर फसल के अनुसार आवश्यक उर्वरक की मात्रा स्वतः प्रदर्शित होगी।
किसान अपनी सुविधा अनुसार सेवा सहकारी समिति (पैक्स), विपणन संघ या निजी उर्वरक विक्रेता का चयन कर ई-टोकन जारी कर सकता है। इसमें समिति सदस्य या गैर-सदस्य होने का विकल्प भी रहेगा।
15 जनवरी से होगी शुरुआत
प्रदेश में ई-टोकन प्रणाली 15 जनवरी 2026 से लागू की जा रही है। प्रारंभिक एक माह तक हाइब्रिड व्यवस्था रहेगी, जिसमें पुरानी व्यवस्था के साथ-साथ ई-टोकन से भी उर्वरक मिल सकेगा। इसके बाद इसे पूर्णतः लागू कर दिया जाएगा।
प्रशिक्षण भी कराया गया
7 जनवरी 2026 को सागर संभाग स्तर पर सेवा सहकारी समितियों, पैक्स, विपणन संघ, एमपी एग्रो तथा कृषि विभाग के अधिकारियों और उर्वरक विक्रेताओं का प्रशिक्षण आयोजित किया गया, जिसमें ई-टोकन प्रणाली की प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी दी गई।
उप संचालक कृषि ने बताया कि इस नई व्यवस्था से किसानों को उनकी भूमि और फसल के अनुसार पर्याप्त उर्वरक समय पर मिलेगा और वे लंबी कतारों व बिचौलियों की परेशानी से मुक्त हो सकेंगे।
