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“छतरपुर में सड़क सुरक्षा को लेकर कलेक्टर का सख्त कदम — एक सप्ताह में आवारा पशुओं को गौशालाओं में भेजने के निर्देश”

छतरपुर जिले में आए दिन हो रही सड़क दुर्घटनाओं और उससे होने वाली पशु एवं जनहानि को रोकने हेतु जिला प्रशासन ने एक बड़ा एवं सख्त निर्णय लिया है। कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट पार्थ जैसवाल ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 163 (1) के तहत राज्य की सभी सड़कों पर पशु छोड़ने पर प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किए हैं। यह आदेश जिले की समस्त राजस्व सीमाओं में आगामी दो माह तक प्रभावशील रहेगा।

कलेक्टर के निर्देश के अनुसार, नेशनल हाईवे, स्टेट हाईवे, प्रमुख जिला मार्ग, ग्राम सड़कें एवं शहरी क्षेत्रों की गलियों-सड़कों पर अब कोई भी पशुपालक अपने पशुओं को खुले में नहीं छोड़ेगा। दूध के उपयोग हेतु पालन किए जा रहे पशुओं को पालक अपने कैंपस के भीतर ही रखेंगे।

जनपद पंचायतों, नगरीय निकायों एवं ग्राम पंचायतों को आदेशित किया गया है कि वे एक सप्ताह के भीतर सभी आवारा एवं निराश्रित पशुओं को निकटतम गौशालाओं में भेजने की कार्यवाही करें। यदि निर्धारित समयसीमा में यह कार्य नहीं किया गया और आवारा पशु सड़कों पर पाए गए, तो संबंधित अधिकारी के विरुद्ध विभागीय अनुशासनात्मक कार्यवाही के साथ-साथ भारतीय न्याय संहिता की धारा 223 के तहत अभियोजन की कार्यवाही की जाएगी।

गौशालाओं की व्यवस्था पर निगरानी बढ़ाई गई है। उप संचालक पशुपालन एवं सहायक पशु चिकित्सा अधिकारी को निर्देशित किया गया है कि वे गौशालाओं का प्रतिदिन निरीक्षण करें, जियो टैगिंग एवं पंजी संधारण सुनिश्चित करें। यदि कोई पशुपालक गौशाला में छोड़ा गया पशु वापिस ले जाना चाहता है, तो बिना खुराक खर्च और अर्थदंड चुकाए पशु सौंपा नहीं जाएगा।

यह आदेश पशुओं एवं नागरिकों की जान-माल की सुरक्षा, सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम और सार्वजनिक स्थलों की सफाई एवं सुव्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए लागू किया गया है।

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