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पक्षियों से हमारी दुनिया हैं, हम से पक्षी नहीः डॉ. निकेत

-गीष्म ऋतु में पक्षियों के संरक्षण विषय बच्चों से किया संवाद, सीखा घोषला बनाना

छतरपुर। गर्मियों के दिनों में आपने अक्सर देखा होगा कि पक्षी दाना-पानी की तलाश में इधर-उधर भटकते रहते हैं। अब हमारी जिम्मेदारी है कि अपने आसपास पक्षियों के लिए किसी छायादार जगह या पेड़ पर पानी और भोजन की व्यवस्था करें। क्योंकि ये पक्षी दिखने में जरूर छोटे लगते हैं लेकिन हमारे लिए बहुत बड़ा काम करते हैं। या सीधा यूं कहें कि यदि हमारे आसपास पक्षी नहीं होंगे हमारे समाज का जीवन भी बहुत मुश्किल हो जाएगा। इस तरह से  समाजसेवी संस्था द्वारा आयोजित कार्यशाला में पक्षियों के जानकार डॉ. निकेत मिश्रा ने बच्चों के साथ गर्मियों के दिनों में पक्षियों की देखभाल विषय पर अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि वे लंबे समय से बुंदेलखंड अंचल में पक्षियों के संरक्षण के लिए सरकारी विभाग और निजी तौर पर कार्य कर रहे हैं। वर्तमान श्रीकृष्णा विश्वविद्यालय में जीव विज्ञान विभाग के एचओडी के रूप में सेवाएं दे रहे हैं। समय-समय पर पक्षियों के सर्वे और कार्यशालाओं में लोगों को पक्षियों से संबंधित जानकारी भी देते हैं। अतिथि का संस्था के संचालक विपिन अवस्थी शील्ड एवं प्रशस्ति पत्र भेंटकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का संचालन एवं आभार देंवेंद्र द्वारा किया गया। इस अवसर पर संस्था सचिव अंजू अवस्थी, देवेंद्र सेन, जीतेंद्र शर्मा, प्रमोद रैकवार, गौतम विश्वकर्मा, अजय यादव एवं ऊदल सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

-युवाओं ने सकोरे एवं पक्षी घर बनाना सीखा

डॉ. मिश्रा ने बच्चों को घर पर कैसे कम बजट में आसान तरीके से पक्षियों के पानी के सकोरे और बेकार सामान से पक्षी घर (घोषला) बनाने का लाइव डेमो देकर प्रशिक्षण दिया गया। साथ ही जमीनी स्तर पर पक्षी संरक्षण के लिए उनके द्वारा किए गये बचाव कार्यों का अनुभव भी साझा किया। उन्होंने कहा कि धूप में गश खाकर गिरे पक्षियों पर सीधे पानी न डाले पहले उन्हें छायादार जगह पर ले जाएं। स्थिति समान्य होने पर दाना-पानी दें। घायल अवस्था सबसे पहले खून का बहना बंद करें, घाव को साफ करके पट्टी बांधे और चिकित्सक से उपचार करायें।

-सवालों का जवाब देकर जिज्ञासा की शांत

पक्षी संरक्षण के लिए आयोजित कार्यशाला के दौरान प्रश्नोत्तर सत्र में छात्र-छात्राओं ने कई सवाल भी पूछे। जिसका विषय विशेषज्ञ ने सरलता से जवाब देकर युवाओं की जिज्ञासा शांत की। बच्चों ने पक्षियों के लिए दाना-पानी कहां और कैसे रखना चाहिए। यदि कोई पक्षी घायल अवस्था में मिले तो हमें सबसे पहले क्या करना चाहिए। पक्षियों को गर्मियों में कैसे राहत पहुंचाएं इसके लिए वीडियो के माध्यम से जानकारी भी दी गई। बच्चों ने भी पक्षियों से जुड़े अनुभवों को बताते हुए दूसरों को पक्षी संरक्षण के लिए प्रेरित किया।

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