मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि पुलिस बेहद कठिन परिस्थितियों में अपना कर्तव्य निभाती है, इसलिए उनका कल्याण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि अब प्रदेश में मध्यप्रदेश पुलिस भर्ती बोर्ड का गठन किया जाएगा।
अब तक पुलिस भर्ती कर्मचारी चयन मंडल से होती थी, लेकिन नए बोर्ड के गठन से भर्ती प्रक्रिया और तेज़, पारदर्शी और परफ़ेक्ट होगी।
उन्होंने बताया कि इस वर्ष 7,500 पदों पर भर्ती की अनुमति दी गई है।
अगले तीन वर्षों में हर साल 7,500 पदों पर भर्ती कर 22,500 रिक्त पद भरे जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिस, जेल और नगर सेना के शहीदों के परिजनों और बच्चों के लिए स्नातक स्तर के कोर्स में एक अतिरिक्त सीट पर आरक्षण दिया जाएगा।
वहीं, वीवीआईपी ड्यूटी में तैनात सुरक्षा कर्मियों और डीएसपी से ऊपर के अधिकारियों को भी अब विशेष भत्ता और जोखिम भत्ता मिलेगा।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने स्वतंत्रता दिवस पर पदक विजेता पुलिस, जेल और नगर सेना के 65 अधिकारियों-कर्मचारियों को सम्मानित किया।
इनमें 12 को पुलिस वीरता पदक, 8 को राष्ट्रपति का पुलिस पदक, और कई अन्य को सराहनीय सेवा पदक प्रदान किए गए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अनुशासन और सेवा समर्पण ही यूनिफॉर्म सर्विसेस की पहचान है। उन्होंने नक्सलवाद पर कड़ा रुख दिखाते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में मार्च 2026 तक मध्यप्रदेश को नक्सलमुक्त बनाने का संकल्प लिया गया है।
कार्यक्रम के दौरान पुलिस बैंड की प्रस्तुतियों और देशभक्ति गीतों ने वातावरण को भावनात्मक और गौरवपूर्ण बना दिया।
मुख्यमंत्री ने पदक विजेताओं और उनके परिजनों से आत्मीय मुलाकात की और समूह चित्र भी खिंचवाए।
यह समारोह न केवल सम्मान का पल बना, बल्कि पुलिस बल के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता का भी सशक्त संदेश देता है।
