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75 करोड़ की जमीन के लिए मालिक को मारकर खेत में गाड़ दिया

75 करोड़ की जमीन के लिए मालिक को मारकर खेत में गाड़ दिया

मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में लालच की एक अनोखी घटना सामनेव आयी है जिसमे 22 जमीन पर एक पुलिस वाले ने फार्म हाउस मालिक को मारकर खेत में दफना दिया। घटना नर्मदापुरम थाना क्षेत्र की है सेमरी खुर्द गॉव के फार्म हाउस मालिक और पेशे से किसान प्रशांत पटेल 21 जून से लापता है जिनका शव 15 दिन बाद उन्ही के खेत में गड़ा हुआ मिला। इस घटना को अंजाम दिया है नर्मदापुरम थाना के हेड कांस्टेबल चेतन पाठक ने , अपने भांजे के साथ मिलकर इस घटना को अंजाम दिया है। पुलिस को जब इन पर शक हुआ तो पुलिस ने इन्हे गिरफ्तार कर लिया और इनसे पूछताछ की तो इन्होने सब उगल दिया। मामला 22 एकड़ की जमीन को लेकर है जिसकी रजिस्ट्री होनी थी कांस्टेबल इस जमीन में हिस्सेदारी मांग रहा था इस जमीन की कीमत 75 करोड़ रुपए है जिसपर आरोपियों की नियत बिगड़ गयी थी । आरोपी ने बताया की 21 जून को शाम को प्रशांत अपने घर से अपने फार्म हाउस पर आ गया था। सेमरी खुर्द का उसका ही दोस्त मयंक तिवारी और अपने मामा चेतन और संदीप कुशवाहा के साथ फार्म हाउस पंहुचा यह पर सबने मिलाकर पार्टी की इसी बीच सन्दीप ने रॉड उठा कर प्रशांत के सर पर दे मारी जिससे प्रशांय की मौके पर ही मौत हो गयी बाद में उन्होंने गड्डा खोदकर उसे वहीं गाड़ दिया और तीनो रात में ही भोपाल भाग गए।
आरोपियों को दो दिन की रिमांड पर रखा गया है।
पैसा किसी का भी ईमान डगमगा सकता है और उसे कैसा भी गुनाह करने के लिए मजबूर किया जा सकता है।

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मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुंदेलखंड को फीनिक्स के पक्षी की तरह राख से निकलकर जीवित होने वाला बताया। उन्होंने कहा कि यहां के वीर योद्धाओं को उनकी वीरता और अद्वितीय पराक्रम के लिये सदैव याद किया जायेगा। बुंदेलखंड के गौरवशाली व्यक्तित्व जैसे आल्हा उदल, महाराजा छत्रसाल जैसे लोगों से बुंदेलखंड गौरवान्वित किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने खजुराहो के महाराजा छत्रसाल कन्वेंसन सेंटर में बागेश्वर धाम में राष्ट्रपति श्रीमती द्रोपदी मुर्मु और प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के संभावित आगमन के मद्देनजर तैयारियों की समीक्षा में यह बाते कहीं। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम पूर्ण गरिमामय होना चाहिए इसमें किसी भी प्रकार की कोई कोर कसर नहीं रखी जायें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यहां पर पहली नदी जोड़ो परियोजना, पहला अंतरर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा एवं पहला फाइव स्टार होटल इसी बुंदेलखंड की धरती पर स्थापित हुआ। प्रधानमंत्री श्री मोदी स्वयं कैंसर हॉस्पिटल के भूमि पूजन हेतु पधार रहे हैं। यह एक ऐतिहासिक पल होगा। बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि यह पहला मौका होगा जहां मंदिर में अस्पताल होगा। उन्होंने सभी का धन्यवाद दिया। सांसद श्री शर्मा ने कहा कि बुंदेलखंड हरा भरा और समृद्ध शाली बनें। उन्होंने कहा मुख्यमंत्री के त्वरित गवर्नेंस की प्रशंसा करते हुए कहा कि बुन्देलखण्ड पर तो राजनैतिक पर्यटन तो बहुत लोगों ने किया। बुंदेलखंड की तस्वीर बदलने की परिसंवाद करने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव आगे आए और उनका सहयोग रहा। इससे आज के समय में यह परिसंवाद बुंदेलखंड के लिए प्रसंगिग है। इससे बुंदेलखंड की तस्वीर बदलेगी। इस अवसर पर सांसद खजुराहो वी.डी. शर्मा, वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री श्री दिलीप अहिरवार सहित विधायक छतरपुर श्रीमती ललिता यादव, बिजावर विधायक राजेश शुक्ला, राजनगर विधायक श्री अरविंद पटेरिया, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती विद्या अग्निहोत्री, पूर्व विधायक श्री उमेश शुक्ला, पूर्व विधायक श्री प्रद्युम्न सिंह लोधी सहित अन्य जनप्रतिनिधि गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। जिले की जल सहेलियों ने की भेंट जिले की जल सहेलियों ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव से भेंट करते हुए उनके द्वारा जल संरक्षण के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों से अवगत कराया। मुख्यमंत्री द्वारा उनके द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना की गई। कार्यक्रम स्थल का किया भ्रमण मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर श्री शास्त्री, लोक निर्माण मंत्री श्री राकेश सिंह, जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ कार्यक्रम स्थल का मौका मुआयना किया। उन्होंने निर्देश दिये कि समय-सीमा में बेहतर तैयारियां सुनिश्चित की जायें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बालाजी मंदिर में पीठाधीश्वर श्री शास्त्री के साथ पूजा अर्चना की।

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रचनात्मक संवाद, व्यक्तिगत ईमानदारी, निस्वार्थ समर्पण, करुणा और परस्पर सम्मान शासन का ‘पंचामृत’ हैं: उपराष्ट्रपति उपराष्ट्रपति ने जोर देकर कहा कि गीता का संदेश प्रत्येक नागरिक के लिए मार्गदर्शक की तरह है उपराष्ट्रपति ने कहा कि पिछले दशक में भारत की प्रगति में ‘साथी’ और ‘सारथी’ की भूमिका निर्णायक रही है उपराष्ट्रपति ने कहा कि विकसित भारत अब एक सपना नहीं है, यह हमारा लक्ष्य है उपराष्ट्रपति ने कहा कि विकसित राष्ट्र की राह पर आगे बढ़ते हुए भारत की आवाज विश्व स्तर पर गूंजेगी उपराष्ट्रपति ने चेतावनी दी कि हमें अपने संविधान और संस्थाओं को कमजोर करने की कोशिश करने वाली ताकतों के खिलाफ सतर्क रहना चाहिए Posted On: 08 DEC 2024 6:25PM by PIB Delhi भारत के माननीय उपराष्ट्रपति श्री जगदीप धनखड़ ने आज घोषणा की कि विकसित भारत अब एक सपना नहीं बल्कि एक निश्चित लक्ष्य है। उन्होंने कहा, “हमें गीता के ज्ञान को याद रखना चाहिए। अर्जुन ने जो ध्यान दिया- उनकी नज़र मछली पर नहीं बल्कि लक्ष्य पर थी। हमें यह सुनिश्चित करने के लिए वही दृष्टि, ध्यान और दृढ़ संकल्प रखना चाहिए कि भारत 2047 तक या उससे भी पहले एक विकसित राष्ट्र का दर्जा प्राप्त कर ले।” हरियाणा के कुरुक्षेत्र में अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव 2024 में उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा, “साथी और सारथी की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है। भारत ने पिछले एक दशक में यह देखा है- अभूतपूर्व आर्थिक प्रगति, अविश्वसनीय संस्थागत ढांचे का निर्माण और वैश्विक स्तर पर एक अद्वितीय स्थिति और सम्मान, जो कभी अकल्पनीय था।” उन्होंने कहा, “भारत की आवाज़ आज बहुत मज़बूती से गूंजती है। हम न केवल एक महाशक्ति के रूप में उभर रहे हैं, बल्कि हमने एक रास्ता भी चुना है – 2047 तक एक विकसित भारत का रास्ता।” अपने संबोधन में श्री धनखड़ ने सभी से गीता के सार को अपनाने और सकारात्मक सोच के साथ राष्ट्र की प्रगति में योगदान देने का आग्रह किया। उन्होंने गीता की शिक्षाओं से प्रेरित शासन के “पंचामृत मॉडल” की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “मैंने इस बात पर गहराई से विचार किया कि मैं इस पवित्र स्थान से ऐसा क्या संदेश दे सकता हूं जिसे हर नागरिक दूसरों पर निर्भर हुए बिना अपना सके। मैं गीता से पांच मूलभूत सिद्धांत प्रस्तावित करता हूं, जिन्हें मैं शासन का पंचामृत कहता हूं, जिन्हें हर नागरिक दृढ़ संकल्प के साथ लागू कर सकता है।” उपराष्ट्रपति ने पांच स्तंभों के बारे में विस्तार से बताया: रचनात्मक संवाद: उन्होंने कहा, “श्रीकृष्ण और अर्जुन के बीच संवाद हमें सिखाता है कि मतभेदों को विवाद नहीं बनना चाहिए। मतभेद स्वाभाविक हैं क्योंकि लोग अलग-अलग सोचते हैं। यहां तक कि हमारी संविधान सभा में भी मतभेद थे, लेकिन उन्होंने बहस और चर्चा के ज़रिए उन्हें सुलझाया। यह एक महत्वपूर्ण संदेश है और मैं उम्मीद करता हूँ कि हमारे सांसद, विधान सभा के सदस्य, स्थानीय प्रतिनिधि और सभी संस्थाएँ रचनात्मक संवाद पर ध्यान केंद्रित करेंगी। संवाद का नतीजा सामाजिक और राष्ट्रीय हितों को पूरा करना चाहिए, न कि व्यक्तिगत लाभ।” श्री धनखड़ ने जोर देकर कहा, “दूसरा सिद्धांत व्यक्तिगत ईमानदारी है। जो लोग जिम्मेदारी के पदों पर हैं, चाहे वे प्रशासन, राजनीति या अर्थशास्त्र में हों, उन्हें उदाहरण के रूप में नेतृत्व करना चाहिए। उनके आचरण से जनता को प्रेरणा मिलनी चाहिए, क्योंकि इसका समाज पर गहरा प्रभाव पड़ता है।” उन्होंने निस्वार्थ भावना की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए कहा, “तीसरा सिद्धांत निस्वार्थ समर्पण है। भगवान कृष्ण सिखाते हैं, ‘यज्ञार्थ कर्मणो’ – काम व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं बल्कि व्यापक भलाई के लिए होना चाहिए। इसी भावना के साथ, मैं सभी से अपील करता हूं कि 2047 तक विकसित भारत का निर्माण एक महान यज्ञ है। राष्ट्र के कल्याण के लिए सभी को अपनी क्षमता के अनुसार इस सामूहिक प्रयास में योगदान देना चाहिए।” उपराष्ट्रपति ने रेखांकित किया, “चौथा सिद्धांत करुणा है। करुणा हमारी 5,000 साल पुरानी संस्कृति का सार है। कोविड-19 संकट के दौरान, भारत ने अपनी चुनौतियों का सामना करते हुए भी 100 से अधिक देशों को टीके उपलब्ध कराकर अपनी करुणामयी भावना का प्रदर्शन किया। आज, चाहे वह समुद्र में फंसे जहाजों को बचाना हो, युद्ध के दौरान छात्रों को निकालना हो, या भूकंप और अकाल जैसी प्राकृतिक आपदाओं के दौरान सहायता प्रदान करना हो, भारत हमेशा सबसे पहले प्रतिक्रिया देने वाला रहा है। इस करुणा को हर किसी के जीवन में जगह मिलनी चाहिए।” श्री धनखड़ ने कहा, “पांचवां सिद्धांत परस्पर सम्मान है। प्रतिस्पर्धा आवश्यक है, लेकिन इससे संघर्ष नहीं होना चाहिए। आज, कोई दुश्मन नहीं है – केवल अलग-अलग दृष्टिकोण हैं। यह विविधता हमारे देश के लिए महत्वपूर्ण है। हमारे पास कितनी विविधता है, इस पर विचार करें, फिर भी यह सब एकता में परिवर्तित हो जाती है। इस विचार को पंचामृत ढांचे के तहत शासन में एकीकृत किया जा सकता है।” उपराष्ट्रपति ने भारत की प्रगति और एकता के लिए चुनौतियों पर भी प्रकाश डाला और कहा, “देश के भीतर और बाहर कुछ ताकतें व्यवस्थित रूप से भारत की अर्थव्यवस्था और संस्थानों को कमजोर करने का प्रयास कर रही हैं। उनका इरादा हमारी संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करना और हमारी प्रगति के मार्ग को बाधित करना है। ऐसी ताकतों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।” इस अवसर पर हरियाणा के राज्यपाल श्री बंडारू दत्तात्रेय, हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी, स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज और अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे।

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कृषि में नई तकनीक से बढ़ेगी किसानों की आय: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

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