दमोह न्यूज़ – मध्यप्रदेश के दमोह जिले के गंगा जमना स्कूल का मामला तूल पकड़ता जा रहा है, छात्राओं को हिजाब पहनाने के बाद अब महिला शिक्षकों के धर्मांतरण की बात भी सामने आई है। स्कूल की प्रिन्सिपल समेत तीन और शिक्षकाओं ने ये माना है कि जब उन्होंने स्कूल में पढ़ाना शुरू किया था तब वे हिंदू थीं और उन्होंने बाद में इस्लाम में धर्मपरिवर्तन कराया है।
स्कूल की जांच में सामने आई बातों से बता चला है कि अन्य धर्मों के छोटे बच्चों को मजहबी तालीम दी जा रही है जो कि विधालय की मान्यता के हिसाब से अवैध है। बच्चों ने बताया नमाज ना पढ़ने पर स्कूल प्रबंधन द्वारा सजा दी जाती है और स्कूल में कलावा और तिलक लगा कर आने की भी मनाही होती है
आज तक जितनी भी टीमें स्कूल की जांच करने गईं स्कूल प्रबंधन ने हिजाब को स्कार्फ बताया है लेकिन सोचने की बात है कि किसी स्कूल ड्रेस में स्कार्फ की जरूरत ही क्या होती है, पूरे मामले पर गौर करें तो जांच टीमें भी संदेह के दायरे में आती दिख रहीं हैं। जिसको लेकर हिंदू संघटनों में व्यापक रोष और गुस्से के चलते कुछ गुस्साए युवकों ने दमोह जिला शिक्षा अधिकारी के चेहरे और कपड़ों को सियाही से काला कर विरोध जताया है।
जांच में स्कूल प्रबंधन के पास कई हजार करोड़ रुपए की बेनामी सम्पत्ति की जानकारी सामने आई है,जिसमें गंगा जमना कपड़ा शोरूम, गंगा जमना धर्म कांटा, दाल मिल, बीड़ी फैक्ट्री और रेत खनन जैसे व्यापारों ने से हज़ारों करोड़ों रुपये की आय के साथ सरकार के excise चोरी और टेरर फंडिंग की आशंका जतायी जा रही है।
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं? लेकिन सवाल अब भी बाकी है स्कूल प्रबंधन इतना बड़ा एजेंडा चला किसकी सहायता से रहा था और क्या सच में हिंदू छात्राओं को टारगेट किया जा रहा है?

