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सनातनी खरीदारी की अपील पर बोले लोग: पेट का कोई धर्म नहीं, अगर हर कोई अपने धर्म से खरीदेगा तो आधे लोग भूखे रह जाएंगे

सोशल मीडिया पर हाल ही में “केवल सनातनी दुकानों से खरीदारी करने” की अपील चर्चा में है। इस पर आम लोगों ने मिलीजुली प्रतिक्रिया दी है। कई लोगों ने कहा कि “पेट का कोई धर्म नहीं होता — न दुकानदार का, न ग्राहक का”। उनका मानना है कि धर्म के आधार पर व्यापार या खरीदारी को बांटना समाज में विभाजन बढ़ाएगा।

एक स्थानीय नागरिक ने कहा, “अगर हिंदू सिर्फ हिंदू से खरीदे और मुसलमान सिर्फ मुसलमान से, तो कई घरों में रात को चूल्हा नहीं जलेगा।”
दूसरे व्यक्ति ने कहा, “धर्म आस्था का विषय है, पर बाजार रोज़मर्रा की ज़रूरतों से चलता है। हमें इंसानियत से खरीदना चाहिए, न कि धर्म देखकर।”

वहीं, कुछ लोगों का कहना है कि अपनी संस्कृति और उत्पादों को प्राथमिकता देना गलत नहीं है, लेकिन इसके नाम पर सामाजिक सौहार्द को ठेस नहीं पहुंचनी चाहिए।

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